अस्पताल की बड़ी लापरवाही! हिंदू-मुस्लिम परिवार का बच्चा बदला, विवाद बढ़ा तो होगा DNA टेस्ट…7 मिनट के अंतराल में जन्म, 4 दिन बाद खुला राज, पढ़िए पूरी खबर……..

छत्तीसगढ़: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां जन्म के बाद हिंदू और मुस्लिम परिवार के नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई। यह गलती अस्पताल स्टाफ से हुई, लेकिन जब यह मामला सामने आया तो हिंदू मां साधना सिंह ने बच्चा लौटाने से इनकार कर दिया। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है और अगर समाधान नहीं निकला तो DNA टेस्ट कराया जाएगा।
7 मिनट के अंतराल में जन्म, 4 दिन बाद खुला राज………
मामला 23 जनवरी 2024 का है, जब दुर्ग जिला अस्पताल के मदर-चाइल्ड वार्ड में शबाना कुरैशी और साधना सिंह ने 7 मिनट के अंतराल में बच्चों को जन्म दिया। दोपहर 1:25 बजे शबाना ने बेटे को जन्म दिया, जबकि 1:32 बजे साधना सिंह ने भी बेटे को जन्म दिया। अस्पताल की लापरवाही के कारण नहलाने के दौरान दोनों बच्चों की अदला-बदली हो गई और किसी को इसका पता नहीं चला। तीन दिन बाद, जब शबाना अपने बच्चे को नहला रही थी, तब उसके हाथ में लगे “बेबी ऑफ साधना” टैग को देखकर उसे शक हुआ। साथ ही, जन्म के समय अस्पताल द्वारा खींची गई तस्वीर से बच्चे का मिलान नहीं हुआ। शबाना ने देखा कि तस्वीर में बच्चे के शरीर पर एक बर्थमार्क था, जो उसके पास मौजूद बच्चे में था, जबकि असली बच्चा साधना सिंह के पास चला गया।
साधना ने कहा- “अब यह मेरा बच्चा है, मैं नहीं लौटाऊंगी!”…….
मामले की जानकारी जब दोनों परिवारों को लगी तो वे अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। हालांकि, साधना सिंह ने बच्चे को लौटाने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें बच्चे से लगाव हो गया है और अब वह इसे नहीं छोड़ेंगी। मामला तूल पकड़ने पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. हेमंत साहू ने कोतवाली थाने में सूचना दी। वहीं शबाना कुरैशी के परिवार ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रही है। लेकिन अगर सहमति नहीं बनती तो DNA टेस्ट के जरिए यह साबित किया जाएगा कि असली माता-पिता कौन हैं।
कलेक्टर के निर्देश पर जांच समिति गठित……..
शबाना के परिवार ने कलेक्टर से शिकायत की, जिसके बाद कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने डिप्टी कलेक्टर एम. भार्गव के नेतृत्व में जांच टीम गठित की। जांच टीम ने अस्पताल रिकॉर्ड और स्टाफ से पूछताछ की, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

अस्पताल की लापरवाही पर बड़ा सवाल!
इस घटना ने जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। नवजात शिशुओं की सही पहचान के लिए अस्पताल में टैग सिस्टम लागू किया गया था, लेकिन स्टाफ की गलती से दो परिवारों की दुनिया ही बदल गई। अब देखना यह है कि क्या परिवार आपसी सहमति से बच्चों की अदला-बदली करेंगे, या फिर DNA टेस्ट के नतीजे का इंतजार करना पड़ेगा।

