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बिलासपुर! नियम-कायदों की उड़ाई धज्जियां, जिम्मेदारों ने मूंदी आंखें..आदिवासी जमीन की हो रही धड़ल्ले से सौदेबाजी, रफ्तार न्यूज सीजी में खबर पढ़कर जानें पूरी कहानी……

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) अवैध प्लॉटिंग के कई मामले सुनने को मिलते हैं, लेकिन इस बार हम आपको एक ऐसे भू-माफिया की कहानी बताने जा रहे हैं जो आदिवासी भूमि को निशाना बनाता है। इस माफिया का पूरा नेटवर्क आदिवासी जमीनों की खरीद-फरोख्त पर आधारित है। बिना किसी वैध नगर निगम की अनुमति, लेआउट या डायवर्सन के यह व्यक्ति आदिवासी भूमि को टुकड़ों में बेच देता है। इस नेटवर्क का प्रमुख उद्देश्य आदिवासी भूमि को कम दामों पर खरीदकर उसे छोटे-छोटे प्लॉट्स में विभाजित करना और फिर इन्हें बिना किसी कानूनी अनुमति के बेच देना है। खरीदारों में ज्यादातर शासकीय कर्मचारी शामिल होते हैं, जो कि इन जमीनों को बेनामी तरीके से अपने परिवार के नाम पर खरीदते हैं। इन कर्मचारियों का मकसद होता है कि बाद में इन जमीनों का डायवर्सन कराकर उन्हें ऊंचे दामों पर बेच सकें। इस तरह के गैरकानूनी कार्यों से साफ़ है कि सरकार द्वारा बनाए गए आदिवासी संरक्षण नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

अवैध प्लॉटिंग का पूरा नेटवर्क….

यह मामला बिलासपुर के ग्राम बिरकोना का है। इस क्षेत्र में कुछ जमीनों के खसरा नंबर 1259, 1200/1 और 240/2 हैं, जिनकी बिक्री में सरकार के किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। इस भू-माफिया ने इस जमीन के आसपास की सरकारी जमीन, जैसे कि खसरा नंबर 1260 को भी अपने अवैध कार्यों में शामिल कर लिया। इस सरकारी जमीन को भी अवैध रूप से बेच दिया गया। जो जानकारी सामने आई है, उसमें यह भी स्पष्ट है कि हर महीने आठ से दस प्लॉट्स की बिक्री हो रही है। यह दिखाता है कि किस तरह यह माफिया आदिवासी भूमि की लगातार अवैध खरीद-फरोख्त में जुटा हुआ है।

जिम्मेदार विभाग की उदासीनता…….

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस अवैध कार्यवाही पर जिम्मेदार विभागों ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। हमारे पास उपलब्ध सूची में क्रमांक एक से लेकर पैंतीस तक की जमीनों की बिक्री का रिकॉर्ड मौजूद है, जिसमें हर प्लॉट का रकबा, रजिस्ट्री संख्या तक दी गई है। इसके बावजूद किसी प्रकार की छानबीन नहीं की गई। ऐसा लगता है कि जिम्मेदार विभाग या तो अनजान बने बैठे हैं या फिर जान-बूझकर इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे हैं। आजकल जब तकनीकी की मदद से सरकार हर बैंक खाते, आय से अधिक संपत्ति और काले धन पर नजर रख रही है, तो यह मामला आखिर कैसे अछूता रह गया? कोयला घोटाले जैसे बड़े घोटालों में कई आईएएस अधिकारी जेल में हैं, फिर भी ऐसा क्या कारण है कि इस मामले पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया?

अब देखिए उस पूरी सूची को……

इसे देखने के बाद आप क्या कहेंगे कि ऐसे भू माफिया पर आखिर किसकी दया दृष्टि काम कर रही है। इतना सब होने के बाद भी कार्यवाही अब तक क्यों नहीं हुई।

देखना होगा…. कि इस मामले में सरकार की नजरें कब टेढ़ी होगी…???

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