बिलासपुर में सिविल लाइन थाने के लॉकअप में ब्लेडबाजी; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, आरोपी ने खुद को किया लहूलुहान..थाने के भीतर हुई घटना ने खोली पुलिस चेकिंग व्यवस्था की पोल, आखिर लॉकअप तक कैसे पहुंचा ब्लेड?

बिलासपुर: (प्रांशु ठाकुर) न्यायधानी बिलासपुर में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला सीधे सिविल लाइन थाने के लॉकअप से जुड़ा है, जहां एक आरोपी ने कथित तौर पर ब्लेड से खुद पर कई वार कर खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और थाने की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम सिविल लाइन थाना क्षेत्र के जरहाभाठा में मोहर्रम कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। युवक की पहचान 27 वर्षीय राजा कुर्रे के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उसके पास से एक चाकू भी बरामद किया गया था। इसके बाद पुलिस उसे थाने लाकर लॉकअप में बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि शाम करीब 6:30 बजे एक महिला युवक से मिलने थाने पहुंची। इसी दौरान लॉकअप में बंद आरोपी ने ब्लेड से अपने शरीर पर कई वार कर लिए। गंभीर रूप से घायल युवक को तत्काल उपचार के लिए सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आरोपी की गिरफ्तारी के समय तलाशी ली गई थी, तब उसके पास ब्लेड कैसे बचा रह गया। यदि ब्लेड पहले से उसके पास था तो पुलिस की तलाशी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं, और यदि बाद में ब्लेड उसके पास पहुंचा तो यह सुरक्षा में और भी बड़ी चूक मानी जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही सीएसपी निमितेश सिंह अस्पताल पहुंचे और घायल युवक से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में पुलिस का कहना है कि युवक आदतन अपराधी है और उसने पुलिस पर दबाव बनाने अथवा डराने की नीयत से खुद को घायल किया है। फिलहाल पुलिस थाने के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ब्लेड आरोपी तक कैसे पहुंचा। गौरतलब है कि हाल के दिनों में बिलासपुर सेंट्रल जेल और अब थाने के भीतर हुई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन संस्थानों की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने की है, वहीं ऐसी घटनाएं होना पुलिस व्यवस्था की निगरानी और सतर्कता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होती है या फिर यह मामला भी जांच के दायरे तक ही सीमित रह जाता है।
