बिलासपुर; देश में ‘साइलेंट हेल्थ क्राइसिस’: कम उम्र में बढ़ रहीं गंभीर बीमारियां – HON 2026 रिपोर्ट!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) अपोलो हॉस्पिटल्स की हेल्थ ऑफ द नेशन 2026 (HON 2026) रिपोर्ट ने भारत में तेजी से उभरते “साइलेंट हेल्थ क्राइसिस” की चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार अब बीमारियां कम उम्र में ही शुरू हो रही हैं, लंबे समय तक बिना लक्षण के बनी रहती हैं और अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। रिपोर्ट 2025 में किए गए 30 लाख प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप के डेटा पर आधारित है, जो बताती है कि देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा चिंताजनक स्तर तक बढ़ चुका है। हर 3 में से 2 वयस्क नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCD) के जोखिम में। कामकाजी लोगों में लगभग 50% को प्रीडायबिटीज या डायबिटीज, हर 10 में 8 लोग ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त, 70% में विटामिन D की कमी, लगभग आधे में B12 की कमी। युवाओं में बढ़ता खतरा 30 साल से कम उम्र के हर 5 में 1 व्यक्ति प्रीडायबिटिक, दो-तिहाई युवाओं में फिटनेस, ताकत और संतुलन की कमी, 17–25 वर्ष के 66% विद्यार्थियों में कम से कम एक हेल्थ रिस्क, महिलाओं के लिए खास चिंता एनीमिया और मोटापा प्रमुख जोखिम भारत में स्तन कैंसर औसतन 10 साल पहले हो रहा, 40+ उम्र की 359 महिलाओं में 1 को बिना लक्षण के कैंसर। बिना लक्षण भी छिपी बीमारियां 74% फैटी लिवर मरीजों में लिवर एंजाइम सामान्य, 45% लोगों में शुरुआती हृदय रोग (एथेरोस्क्लेरोसिस) बिना लक्षण केवल ब्लड टेस्ट से कई बीमारियां पकड़ में नहीं आतीं। छत्तीसगढ़ की स्थिति मधुमेह: 27.9%, हाई BP: 26.1%, एनीमिया: 25.3%, मोटापा: 79.3%। अपोलो के विशेषज्ञों के अनुसार अब स्वास्थ्य देखभाल को “लक्षण आधारित” से आगे बढ़ाकर प्रेडिक्टिव, पर्सनलाइज्ड और निरंतर देखभाल की ओर ले जाना जरूरी है। समय पर जांच और फॉलो-अप से हाई BP के 56% और डायबिटीज के 34% मामलों में सुधार देखा गया। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत में स्वास्थ्य जोखिम “खामोशी से” बढ़ रहे हैं। ऐसे में नियमित हेल्थ चेकअप, बेहतर जीवनशैली और शुरुआती जांच ही गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
