दुर्ग में दिव्यांग युवती से दुष्कर्म के प्रयास मामले में आरोपी को सजा; पिता के दोस्त ने घर में घुसकर की थी छेड़छाड़, कोर्ट ने सुनाया 5 साल का कारावास!

दुर्ग: (प्रांशु क्षत्रिय) मोहन नगर थाना क्षेत्र में दिव्यांग (मूक-बधिर) युवती से छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रयास के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (FTC) की अदालत ने आरोपी तामेश्वर यादव को 5 वर्ष और 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। घटना 8 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 10 बजे की है। पीड़िता घर में अकेली थी, तभी आरोपी, जो उसके पिता का परिचित था, घर में घुस आया और युवती के साथ जबरन छेड़छाड़ करने लगा। आरोपी ने उसके कपड़े उतारने का प्रयास किया, लेकिन पीड़िता ने साहस दिखाते हुए विरोध किया और मौके से भागकर पड़ोसी के घर पहुंच गई। मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता की गवाही सबसे अहम साबित हुई, जिसे कोर्ट में सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) के माध्यम से दर्ज किया गया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का बयान पूरी तरह विश्वसनीय और सुसंगत है, जिसे उसके माता-पिता और पड़ोसी गवाहों ने भी समर्थन दिया। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के कपड़े जब्त किए और मेडिकल परीक्षण कराया। आरोपी को 9 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी चोट नहीं मिलने के बावजूद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़िता की सशक्त गवाही ही पर्याप्त होती है। बचाव पक्ष द्वारा झूठे फंसाने और गवाहों के विरोधाभासी बयान का तर्क दिया गया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि आरोपी को पता था कि युवती अकेली है और उसने इस भरोसे का गलत फायदा उठाया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 74 (महिला की मर्यादा भंग) और धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराते हुए 5 साल और 3 साल की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही 500 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने पर अतिरिक्त 15 दिन की सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दिव्यांग महिलाएं समाज का अत्यंत संवेदनशील वर्ग हैं और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़िता को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वह मानसिक और आर्थिक रूप से पुनः सशक्त हो सके।


















