बिलासपुर; जमानत के लिए 5 हजार की मांग? सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर आरोप..कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश!

बिलासपुर: (भारतेन्दु कौशिक) शहर की न्यायिक व्यवस्था को लेकर एक गंभीर आरोप सामने आया है। जिला अधिवक्ता संघ ने सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से जुड़े एक मामले में जमानत के नाम पर कथित रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जिला अधिवक्ता संघ के सचिव रवि पांडे ने बताया कि यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र से जुड़ा है। धारा 151 के तहत गिरफ्तार आरोपी रोहित कश्यप की जमानत के लिए एक जूनियर अधिवक्ता सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि जमानत आदेश जारी करने के एवज में 5 हजार रुपये की मांग की गई। संघ का कहना है कि रकम नहीं देने पर आरोपी को जेल भेज दिया गया। बाद में अगले दिन कथित रूप से राशि दिए जाने के बाद उसी व्यक्ति को रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“न्यायिक प्रक्रिया में पैसों का कोई स्थान नहीं”: अधिवक्ता संघ!
अधिवक्ता संघ ने इस पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। सचिव रवि पांडे ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का लेन-देन पूरी तरह अस्वीकार्य है और यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। संघ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों से आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।
सिटी मजिस्ट्रेट ने आरोपों से किया इनकार…..
इस संबंध में जब सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रकार की किसी शिकायत की जानकारी नहीं है। उनके अनुसार अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई है। वहीं जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पुष्टि की कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल, सबकी निगाहें जांच पर…..
जमानत जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में रिश्वत की मांग का आरोप सामने आना प्रशासन और न्यायिक तंत्र दोनों के लिए गंभीर विषय है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है या आरोप केवल आरोप बनकर रह जाते हैं।
