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बिलासपुर; सरकारी आदेशों को ठेंगा दिखा रहे अफसर!..मकान रजिस्ट्री के बाद भी नहीं हुआ नामांतरण..दफ्तरों के चक्कर लगाकर त्रस्त पीड़ित ने ठोकी कलेक्टर दरवाज़े पर दस्तक..शासन के आदेश को मिट्टी में मिलाने वालों पर कब गिरेगी गाज?

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ शासन ने भूमि/मकान की रजिस्ट्री के उपरांत स्वमेव नामांतरण की प्रक्रिया 20 मई 2025 से प्रभावशील की है, ताकि आम नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन बिलासपुर जिले में यह व्यवस्था फाइलों में ही सिमटकर रह गई है। ताजा मामला ग्राम मस्तूरी निवासी श्रीप्रकाश तिवारी का है जिन्होंने दिनांक 21 मई 2025 को बिलासपुर के तोरवा क्षेत्र (हेमू नगर) में एक नवनिर्मित मकान की रजिस्ट्री नियमों के तहत पूरी की, लेकिन अब तक उनका नामांतरण नहीं हो पाया है। रजिस्ट्री के बाद एक पखवाड़े तक उन्हें आश्वासन मिला कि नामांतरण स्वमेव हो जाएगा लेकिन जब 15 दिन बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो वे सह पंजीयक सूर्यकांत भंडारी से मिले। भंडारी ने भ्रम फैलाते हुए कह दिया कि शासन का आदेश केवल जमीन पर लागू होता है, मकानों पर नहीं..इसके बाद श्री प्रकाश तिवारी ने जिला पंजीयक आर.के. स्वर्णकार से संपर्क किया, जिन्होंने न सिर्फ भंडारी के कथन को गलत और भ्रामक बताया बल्कि मौखिक आश्वासन दिया कि दो दिन में ऑनलाइन नामांतरण दिखने लगेगा पर जब ऐसा नहीं हुआ, तो श्री तिवारी ने दोबारा संपर्क किया, इस बार उन्हें तहसीलदार के पास भेज दिया गया। तहसील कार्यालय का जवाब था कि आपकी रजिस्ट्री ऑनलाइन पंजीयन नहीं हुई इसलिए हम साइट पर नहीं देख पा रहे हैं। पहले पंजीयन कराइए फिर नामांतरण करेंगे।

भ्रम फैलाकर कार्यालयों में घुमा रहे अफसर….

श्री प्रकाश तिवारी ने बताया कि वे कोटा स्थित एक निजी संस्थान में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं और बार-बार कार्यालय से छुट्टी लेकर आना, वेतन कटौती और मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। वे लगातार भटकाव, टालमटोल और भ्रमपूर्ण जवाबों से शारीरिक व मानसिक रूप से त्रस्त हो चुके हैं। बुधवार को श्री तिवारी ने पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत कलेक्टर बिलासपुर को सौंपी और आग्रह किया कि रजिस्ट्री उपरांत नामांतरण प्रक्रिया में जानबूझकर ढिलाई बरतने वाले जिला पंजीयक आर.के. स्वर्णकार समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि जब शासन द्वारा स्वमेव नामांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से लागू की जा चुकी है, तो फिर बिलासपुर के अधिकारी क्यों इसका पालन नहीं कर रहे? क्या ये अधिकारियों की लापरवाही है या जनता को जानबूझकर उलझाकर परेशान किया जा रहा है?

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