सीपत; पीएम आवास में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ उजागर!..घर गरीबों के नाम पर, पैसा कर्मचारियों के खाते में..खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गरीबों को पक्के मकान दिलाने के लिए दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। बिलासपुर जिले के सीपत तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बिटकुला में हितग्राहियों की बजाय अन्य लोगों के खातों में सरकारी राशि भेज दी गई, जिसकी पुष्टि जांच में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मस्तूरी विकासखंड के ग्राम बिटकुला में वर्ष 2023-24 के दौरान पीएम आवास योजना के तहत 30 से अधिक लोगों के नाम स्वीकृत हुए थे। लेकिन कई हितग्राहियों को लंबे समय तक राशि नहीं मिली। जब उन्होंने जनपद पंचायत कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई तो मामला जिला पंचायत तक पहुंचा। जांच में सामने आया कि 6 से अधिक हितग्राहियों की राशि किसी और के खातों में ट्रांसफर की गई थी। जांच के बाद सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल ने 5 जिम्मेदार कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिनमें अनुराग सिंह राठौर, तकनीकी सहायक जनपद पंचायत मस्तूरी..छोटे लाल साहू, तात्कालिक ग्राम सचिव…भूपेंद्र यादव वर्तमान सचिव, बिटकुला..लखेश्वर ठाकुर, तात्कालिक अस्थायी रोजगार सहायक..नितेश साहू आवास मित्र, बिटकुला। इन सभी पर मिलीभगत और लापरवाही के आरोप हैं। जिला पंचायत ने आरोपियों से राशि की वसूली और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीईओ संदीप अग्रवाल का कहना है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि जिन अपात्र व्यक्तियों के खातों में राशि भेजी गई, उनके विरुद्ध कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। सिर्फ राशि की वसूली करना भ्रष्टाचार को मौन सहमति देना माना जा रहा है।
कुछ कर्मचारी छोड़ चुके हैं नौकरी, प्रशासन का रवैया असमंजस में…….
इस मामले में लिप्त दो कर्मी रोजगार सहायक और आवास मित्र अब नौकरी छोड़ चुके हैं। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई कितनी प्रभावी होगी, इस पर भी सवालिया निशान है। अब तक की जांच में 6 मामलों में फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक मामलों में अनियमितता की संभावना जताई गई है। यह संकेत देता है कि पीएम आवास योजना में ग्राम स्तर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, जिसमें लाखों रुपए की सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है।
जिम्मेदार कौन? कौन दिलाएगा न्याय…?
क्या दोषियों को केवल नोटिस देकर छोड़ा जाएगा या होगी वास्तव में कठोर कार्रवाई? अब जनता की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना में इस तरह की गड़बड़ी सामने आना न सिर्फ भ्रष्टाचार का संकेत है, बल्कि गरीबों के अधिकारों से खुला खिलवाड़ भी है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इसे कितनी गंभीरता से लेता है।
