सीपत; एनटीपीसी के स्टॉप डैम से प्रभावित किसानों का फूटा आक्रोश..पहुंचे HR गेट..2 घंटे कड़ी धूप में बैठने पर भी बाहर नहीं आए अधिकारी..किसानों ने चेताया, अब सीधी लड़ाई होगी कलेक्टर के दरबार में!

सीपत: (प्रांशु क्षत्रिय) एनटीपीसी सीपत के स्टॉप डैम से प्रभावित ग्राम कौड़िया के लगभग 50 किसान मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर एनटीपीसी सीपत के एचआर गेट पहुंचे। वे अधिकारियों से मिलने और दलदली भूमि का बकाया मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे थे। लेकिन दो घंटे तक कड़ी धूप में इंतजार करने के बावजूद कोई अधिकारी सामने नहीं आए, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों ने स्वयं बाहर आकर बात करने की बजाय सीआईएसएफ की टीम भेज दी, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक अपनी मांगें रखने आए थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। बाद में किसान सीपत तहसीलदार सोनू अग्रवाल से मिले और अपनी शिकायत दर्ज कराई। तहसीलदार ने जानकारी दी कि राजस्व अधिकारियों और एनटीपीसी कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने भूमि निरीक्षण किया है और रिपोर्ट तैयार की गई है। हालांकि किसानों का कहना है कि निरीक्षण के लिए जिन अधिकारियों को भेजा गया था, उन्हें स्थानीय भू-परिस्थितियों की जानकारी नहीं थी, जिससे निष्पक्ष रिपोर्ट की संभावना क्षीण हो गई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे बिलासपुर कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचकर अपनी बात रखेंगे और मुआवजा दिलाने की मांग करेंगे। ग्राम कौड़िया के किसानों ने बताया कि उनकी नंबरी कृषि भूमि एनटीपीसी सीपत के स्टॉप डैम से सटी हुई है। डैम से लगातार हो रहे जल रिसाव के चलते उनकी उपजाऊ भूमि दलदल में बदल गई है, जिस पर खेती करना असंभव हो गया है। एनटीपीसी द्वारा वर्ष 2011 से अब तक किसानों को इस दलदली भूमि के लिए मुआवजा दिया जा रहा था, लेकिन इस वर्ष बिना किसी पूर्व सूचना के कई किसानों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। किसानों का कहना है कि वे अत्यंत गरीब हैं और मुआवजा ही उनके जीवन का आधार है। इस राशि के बिना उन्हें दूसरों से उधार लेकर गुजारा करना पड़ रहा है। बरसात नजदीक है और भूमि अब भी खेती योग्य नहीं है, ऐसे में यदि मुआवजा नहीं मिला, तो उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
एनटीपीसी पर वादाखिलाफी का आरोप…….
किसानों ने आरोप लगाया कि एनटीपीसी ने करीब पांच साल पहले मौखिक आश्वासन दिया था कि यदि मुआवजा बंद किया जाता है, तो वे किसानों की भूमि को खेती योग्य बना देंगे, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ। किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं। मंगलवार को एनटीपीसी अधिकारियों ने सरपंच प्रतिनिधि धनेश्वर साहू, जनपद सदस्य प्रतिनिधि श्री केवट, भाजपा नेता भागवत यादव, जागेश्वर पटेल, मेघनाथ वस्त्रकार, धनशाय चौधरी व रामप्रसाद पटेल के साथ बैठक की, लेकिन बैठक से कोई समाधान नहीं निकला। किसान अश्वनी वस्त्रकार, मोतीलाल केवट, गणेश पटेल व दशरथ ध्रुव ने बताया कि एनटीपीसी केवल वादे करती है, लेकिन जमीन पर कार्रवाई नहीं होती। लगभग 150 एकड़ भूमि के किसान इस साल मुआवजा पाने से वंचित हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं……
01. वर्ष 2024–25 का बकाया मुआवजा तत्काल दिया जाए।
02. आगामी वर्ष 2025–26 और 2026–27 के लिए भी दलदली भूमि के मुआवजे की सूची में नाम जोड़े जाएं।
03. यदि मुआवजा नहीं दिया जा सकता, तो एनटीपीसी द्वारा भूमि को खेती योग्य बनाने की व्यवस्था की जाए।
04. निष्पक्ष भूमि निरीक्षण हो जिसमें स्थानीय जानकारी रखने वाले अधिकारी शामिल हों। किसानों ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और समय रहते न्याय दिलाया जाए।
