बिलासपुर: 15 दिनों से सूखे हैं नल, बोरवेल बंद, टंकी खाली…पलायन की कगार पर 6 हजार लोग…पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण बोले– अब मौत ही बाकी है, सुशासन तिहार बीत गया, लेकिन पानी नहीं आया, खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला……….

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जहाँ एक ओर सरकार सुशासन तिहार मना रही थी, वहीं तखतपुर ब्लॉक का छोटा-सा गांव चनाडोंगरी प्यास से बिलख रहा था। 6 हजार की आबादी वाला यह गांव पिछले 15 दिनों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। गांव की एकमात्र पानी टंकी पूरी तरह सूख चुकी है और जिससे जलापूर्ति होती थी– दोनों बोरवेल बंद पड़े हैं। हालात इतने बदतर हैं कि लोग सुबह से ही आसपास के गांवों से पानी लाने के लिए निकल पड़ते हैं। जानवरों के लिए भी पानी नहीं, मजबूर होकर खड़ी धान की फसल को मवेशियों के हवाले कर दिया गया है। गांव के सरपंच और 17 पंचों ने बताया कि न केवल गांव की टंकी सूखी है बल्कि आसपास का घोंघा जलाशय भी खाली हो गया है। उन्होंने पीएचई विभाग से लेकर CEO तक को लिखित आवेदन सौंपे, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। “अब अगर कलेक्टर नहीं सुनते, तो गांव छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा,” ये कहना है गांव के उन बुजुर्गों का जिन्होंने पिछले कई दशकों में ऐसी जलसंकट की त्रासदी नहीं देखी। ग्रामीणों ने बताया कि लगातार गर्मियों में धान की खेती ने भूजल को रसातल में पहुंचा दिया है। पहले गर्मियों में धान की फसल नहीं ली जाती थी, लेकिन अब जल प्रबंधन की अनदेखी ने गांव को विनाश के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
सरपंच बोले– “सुशासन तिहार में भी रखी थी बात, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।”
अब गांववाले सोमवार को कलेक्टर से मिलकर अंतिम बार गुहार लगाने वाले हैं। अगर इस बार भी निराशा मिली, तो चनाडोंगरी से बड़े पैमाने पर पलायन तय है। ये कोई कहानी नहीं, ये है प्यास की वो त्रासदी जिसे देखकर भी प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।


















