बैलगाड़ी पर निकली बारात: बिना डीजे और तामझाम के निकली देसी बारात; सेलूद गांव में दूल्हे ने सादगी और परंपरा की पेश की मिसाल!

दुर्ग: (प्रांशु क्षत्रिय) पाटन क्षेत्र अंतर्गत सेलूद गांव में एक अनोखी बारात ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। आधुनिकता के दौर में जहां शादियों में लग्जरी गाड़ियां, डीजे और भव्य आयोजन आम हो गए हैं, वहीं इस गांव के एक दूल्हे ने पारंपरिक बैलगाड़ी पर सवार होकर बारात निकालकर सादगी और संस्कृति का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। सजी-धजी बैलगाड़ियों का काफिला जब गांव की गलियों से गुजरा, तो इसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने फूलों की वर्षा कर दूल्हे और बारातियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। खास बात यह रही कि पूरी बारात बिना डीजे और तेज शोर-शराबे के पारंपरिक ढंग से शांतिपूर्वक निकली। इस बारात में न तो आधुनिक तामझाम था और न ही दिखावे की कोई झलक। पारंपरिक वेशभूषा, बैलगाड़ी की सवारी और ग्रामीण माहौल ने सभी का मन मोह लिया। बुजुर्गों ने इस दृश्य को अपने पुराने दिनों की याद बताते हुए कहा कि पहले इसी तरह सादगी और संस्कारों के साथ शादियां संपन्न होती थीं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दूल्हे और उसके परिवार की इस पहल की सराहना की। उनका मानना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं। तेजी से बदलते समय में यह उदाहरण समाज को सादगी, परंपरा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का सकारात्मक संदेश देता है।


















