VIDEO! बिलासपुर; ताला टूटा, हक छिना, सामान गायब! फिर भी FIR नहीं…तारबाहर पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल..भाई-बहन के संपत्ति विवाद की आड़ में किरायेदार की गुहार अनसुनी, CCTV और कबूलनामे के बाद भी नहीं दर्ज हुई चोरी की रिपोर्ट, खबर पढ़कर समझिए पूरा मामला……

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) शहर के तारबाहर थाना क्षेत्र में एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं, जहां भाई-बहन के संपत्ति विवाद की चपेट में आया किरायेदार अब न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। मामला विनोबा नगर स्थित एक गोदाम का है, जहां बिना सूचना के ताला तोड़कर लाखों का सामान गायब कर दिया गया। पीड़ित किरायेदार रमेश गहलोत और मकान मालिक अर्चना लाल की तमाम शिकायतों और सबूतों के बावजूद तारबाहर थाना ने चोरी का मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार अर्चना लाल, जो अपने दिवंगत माता-पिता की संपत्ति में अकेली रह रही थीं, अपने इलाज के लिए रायपुर गई थीं। लौटने पर उन्होंने देखा कि उनके मकान का ताला टूटा हुआ था और भाई अरुण लाल ने वहां कब्जा कर नया ताला जड़ दिया था। साथ ही किरायेदार रमेश गहलोत के गोदाम का भी ताला तोड़ा गया और वहां रखा लाखों का सामान रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। रमेश गहलोत ने बताया कि ना उन्हें कोई नोटिस मिला, ना ही गोदाम खाली करने की सूचना दी गई। बिना पूर्व जानकारी के उनके व्यवसाय से जुड़े सामान को गायब कर दिया गया। किरायेदार ने ये भी कहां कि हमने पुलिस को CCTV फुटेज दिए, जिसमें साफ दिख रहा है कि कैसे कैमरे निकाले गए, फिर भी थाना प्रभारी ने इसे पारिवारिक विवाद कहकर टाल दिया। जानकारी के अनुसार यही अरुण लाल पहले भी चोरी के मामले में नामजद रह चुका है। उस वक्त एसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर FIR दर्ज हुई थी और अब वही आरोपित फिर से विवादों में है।
CCTV में दिखी करतूत, पुलिस के सामने कबूला फिर भी FIR नहीं..!
पुलिस सूत्रों की मानें तो मौके पर पहुंचने पर आरोपित अरुण लाल और उसकी पत्नी ने खुद यह स्वीकार किया कि सामान उनके पास है। इसके बावजूद पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। उल्टा, दोनों पक्षों में समझौते का दबाव बनाने की कोशिश की गई।
महिला पीड़िता का भावुक पत्र IG को…….
अर्चना लाल ने बिलासपुर IG को पत्र लिखकर कहा है कि उसके पास अब ना तो मकान है, ना कोई आय का साधन। भाई ने बलपूर्वक उसे घर से निकाल दिया और धमकी दी कि जो करना है कर लो। उसने मांग की है कि उसे उसके अधिकार का संरक्षण मिलना चाहिए।
अब सवाल उठता है कि…….
- जब सबूत मौजूद हैं, तो FIR क्यों नहीं?
- क्या पुलिस पारिवारिक विवाद की आड़ में आरोपियों को बचा रही है?
- क्या आम नागरिक का हक सिर्फ एक फाइल बनकर रह जाएगा?
1 अप्रैल से रमेश गहलोत और अर्चना लगातार थाना व पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। अब उन्होंने पुलिस कप्तान और IG से न्याय की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है या फिर यह भी घरेलू विवाद कहकर दबा दिया जाएगा। पर सवाल यही है— जब CCTV है, कबूलनामा है, तो FIR क्यों नहीं?
