AUDIO VIRAL: बिलासपुर; गरीबों के इलाज पर डाका..सरकारी अस्पताल में लूट! महिला डॉक्टर ने नसबंदी मरीज से ऐंठे पैसे बाकी के नहीं मिले तो दे डाली श्राप..सरकार कब लेगी एक्शन? खबर पढ़कर समझिए पूरा मामला……..

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) सरकारी अस्पतालों में लूट का खेल जारी है। एक ताजा मामले में जिला अस्पताल के 100 बिस्तर वाले मातृ शिशु अस्पताल की महिला डॉक्टर पर गर्भवती महिला से इलाज के नाम पर 6000 रुपये मांगने का आरोप लगा है। पीड़िता ने जब पैसा देने में असमर्थता जताई, तो डॉक्टर ने उसे धमकाया और अपमानित किया। इस घटना का ऑडियो भी वायरल हो चुका है, जिसमें डॉक्टर को 2000 रुपये एडवांस लेने और बाकी 4,000 रुपये के लिए जोर-जबरदस्ती करते सुना जा सकता है। महिला का आरोप है कि उसने इस संबंध में सिविल सर्जन से शिकायत की है। अस्पताल प्रबंधन ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार कब तक जारी रहेगा? प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़िता ग्राम सेमरचुवा की रहने वाली है, जो नसबंदी के लिए जिला अस्पताल के स्त्री रोग वार्ड में भर्ती हुई थी। 19 मार्च को ऑपरेशन के बाद महिला डॉक्टर ने उससे इलाज के बदले 6000 रुपये मांगे, जिसमें से 2000 रुपये पहले ही ले लिए गए। जब बाकी रकम नहीं मिली, तो डॉक्टर ने उसे धमकाया और ताने मारकर मानसिक प्रताड़ना दी। मजबूर मरीज ने पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर ली और अस्पताल प्रशासन को सौंप दी। सरकार भले ही सिम्स, जिला अस्पताल, मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल और मोहल्ला क्लीनिक जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि गरीबों को अब भी इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ देने का दावा करने वाले अस्पताल भी बिना घूस के इलाज नहीं कर रहे। निजी अस्पतालों की मनमानी का आलम यह है कि विधायक की चेतावनी और सीएमएचओ की चिट्ठी के बावजूद अपोलो हॉस्पिटल ने सात महीने से आयुष्मान योजना लागू नहीं की। इसके चलते मरीजों को घर-जमीन और मंगलसूत्र तक बेचकर इलाज कराना पड़ रहा है। इस लूट पर सवाल विधानसभा में भी उठ चुका है। एक विधायक ने सरकार से मांग की थी कि जब आयुष्मान कार्ड निजी और सरकारी अस्पतालों में नहीं चल रहा, तो इसे खत्म कर कोई दूसरी योजना लाई जाए। यह डबल इंजन सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति है कि गरीबों के लिए बनाई गई योजना सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई है। इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंख मूंदकर बैठे रहेंगे? कब तक गरीब जनता अपने ही हक के इलाज के लिए ठगी जाती रहेगी?
