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शिवनाथ नदी में शराब फैक्ट्री का जहरीला अपशिष्ट! हाईकोर्ट ने पर्यावरण मंडल से मांगा जवाब, पढ़िए पूरी खबर…….

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ के मोहभट्टा-धूमा स्थित मेसर्स भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित शराब कारखाने पर पर्यावरण प्रदूषण का गंभीर आरोप लगा है। फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले और प्रदूषित पानी को बिना शोधन के सीधे शिवनाथ नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई की और पर्यावरण संरक्षण मंडल के अफसरों से जवाब तलब किया। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल ने सोमवार को हुई सुनवाई में पर्यावरण संरक्षण मंडल से स्पष्ट किया कि बिना शोधन के अपशिष्ट नदी में छोड़ने की अनुमति किस आधार पर दी गई? अदालत ने नदी के पानी की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखने और सुधार के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। 20 जुलाई 2024 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया था। रिपोर्ट में बताया गया कि मुंगेली जिले के मोहभट्टा-धूमा गांव में स्थित यह शराब फैक्ट्री अपने अपशिष्ट जल को सीधे नदी में प्रवाहित कर रही है, जिससे आसपास का पर्यावरण और हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20 हजार की आबादी इस प्रदूषण से प्रभावित हो रही है। जहरीले रसायनों के कारण 350 एकड़ से अधिक धान की फसल नष्ट हो चुकी है। इसके अलावा, इन अपशिष्टों से उठने वाली दुर्गंध और जहरीली गैसों से लोगों को सांस लेने में परेशानी, खुजली, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही हैं। बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।

सरकारी रिपोर्ट ने बताया- नदी का पानी साफ!

पिछली सुनवाई में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अदालत में रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया कि शिवनाथ नदी का पानी प्रदूषित नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दावे पर संदेह जताते हुए पर्यावरण संरक्षण मंडल को नए सिरे से विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

अधिवक्ता ने रखा शासन का पक्ष……

इस मामले में शासन की ओर से उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने प्रशासन को इस प्रदूषण पर कड़ी निगरानी रखने और दोषी उद्योगों पर कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

क्या होगी अगली कार्रवाई?

अब 2 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत पर्यावरण संरक्षण मंडल की रिपोर्ट पर फैसला ले सकती है। यदि फैक्ट्री द्वारा पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है।

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