छत्तीसगढ़ पुलिस को नया कप्तान! अरुणदेव गौतम बने DGP, नक्सल मोर्चे से प्रशासन तक का है धाकड़ अनुभव, पढ़िए पूरी खबर…….

रायपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ सरकार ने आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। वे मौजूदा डीजीपी अशोक जुनेजा का स्थान लेंगे, जिनका सेवा विस्तार आज समाप्त हो रहा है। गौतम जल्द ही छत्तीसगढ़ पुलिस की कमान संभालेंगे। अरुणदेव गौतम 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वे भोपाल में एडिशनल एसपी, राजगढ़ के एसपी रह चुके हैं। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उनका कैडर बदल गया, जिसके बाद उन्होंने प्रदेश में छह जिलों के एसपी और दो रेंज के आईजी के रूप में कार्य किया। वे गृह सचिव के रूप में भी लंबे समय तक पदस्थ रहे, जिससे उन्हें शासन स्तर की कार्यप्रणाली की गहरी समझ है। गौतम को सरल और सहज स्वभाव के पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता है, लेकिन कानून-व्यवस्था के मामले में वे उतने ही सख्त माने जाते हैं। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने सीएसपी, एएसपी और एसपी के रूप में प्रभावशाली पुलिसिंग की। बिलासपुर में सीएसपी रहते हुए उनकी गश्त की कार्यशैली काफी चर्चित रही, जहां वे रात में चार बजे तक स्वयं शहर के चौक-चौराहों और थानों का निरीक्षण करते थे। अरुणदेव गौतम उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अभयपुर गांव के निवासी हैं। उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को हुआ और वे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल में पूरी की, जिसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए प्रयागराज चले गए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और राजनीति शास्त्र में परास्नातक (एमए) करने के दौरान उनके कई मित्रों ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। इससे प्रेरित होकर गौतम ने भी इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने जेएनयू नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल किया और पीएचडी की तैयारी के साथ यूपीएससी परीक्षा में प्रयास किया। पहले प्रयास में असफल होने के बावजूद, उन्होंने अपने समर्पण से दूसरे प्रयास में आईपीएस परीक्षा पास की। गौतम की पहली नियुक्ति 1992 में मध्यप्रदेश कैडर में हुई। उन्होंने जबलपुर में प्रशिक्षण के बाद बिलासपुर में सीएसपी, कवर्धा में एसडीओपी और भोपाल में एडिशनल एसपी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वे मध्यप्रदेश पुलिस की 23वीं बटालियन के कमांडेंट और राजगढ़ के एसपी रहे। छत्तीसगढ़ में डीआईजी बनने के बाद, उन्होंने पुलिस मुख्यालय, सीआईडी, वित्त एवं योजना, प्रशासन और मुख्यमंत्री सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं का नेतृत्व किया। उन्हें चुनौतीपूर्ण जिलों में तैनाती दी जाती थी। 2009 में राजनांदगांव में नक्सली हमले के बाद, जिसमें 29 पुलिसकर्मी और एसपी शहीद हुए थे, उन्हें वहां का एसपी बनाया गया, जहां उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती दी।
बस्तर में नक्सल मोर्चे पर अहम भूमिका………
आईजी बनने के बाद गौतम ने छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स, बिलासपुर रेंज और बस्तर रेंज में कार्य किया। झीरम घाटी नक्सली हमले (2013) के बाद, जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने थे, तब उन्हें बस्तर आईजी नियुक्त किया गया। उन्होंने वहां सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराए, जिससे मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
अनुभवी प्रशासक और कुशल रणनीतिकार………
गौतम आईजी रेल, ट्रैफिक, फायर ब्रिगेड और नगर सेना के प्रभारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वे छत्तीसगढ़ के गृह सचिव के रूप में लंबे समय तक पदस्थ रहे, जहां उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में दक्षता साबित की।


















