वोटर लिस्ट में 24.99 लाख नाम कम होने पर सियासत गरमाई : मोहम्मद अकबर ने फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
मोहम्मद अकबर ने छत्तीसगढ़ की मतदाता सूची में 24.99 लाख की कमी पर सवाल उठाए हैं। SIR के दौरान फॉर्म-7 से नाम हटाने की प्रक्रिया की जांच की मांग की....


कवर्धा। छत्तीसगढ़ की मतदाता सूची को लेकर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि वर्ष 2023 के बाद प्रदेश की आबादी बढ़ने के बावजूद मतदाताओं की संख्या में करीब 24 लाख 99 हजार की कमी दर्ज हुई है। अकबर ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
दस्तावेजों के आधार पर जारी अपने बयान में मोहम्मद अकबर ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 का इस्तेमाल कर मतदाताओं के नाम हटाए गए और इस पूरी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
फॉर्म-7 दाखिल होने के बाद भी सीधे नहीं कटता नाम
मोहम्मद अकबर ने कहा कि किसी मतदाता के नाम पर फॉर्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज होने मात्र से उसका नाम मतदाता सूची से स्वतः नहीं हटाया जा सकता। उनके मुताबिक, आपत्ति पर कार्रवाई से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्तिकर्ता को नोटिस देकर उसका पक्ष सुना जाना चाहिए और उसका बयान दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस मतदाता के नाम को हटाने की मांग की गई है, उसे भी अंतिम आदेश से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना जरूरी है। संबंधित अधिकारी को आपत्ति की वास्तविकता और उसकी वैधता को लेकर स्वयं संतुष्ट होना चाहिए। मोहम्मद अकबर ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फॉर्म-7 में जानबूझकर गलत जानकारी देता है या झूठी घोषणा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।
33 जिलों में 1,08,807 नाम हटाने का दावा
पूर्व मंत्री ने प्रदेश के 33 जिलों में कुल 1 लाख 8 हजार 807 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया है। उनके द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में 31,028, कोरबा में 15,187, दुर्ग में 7,209, बालोद में 3,903, बलौदाबाजार-भाटापारा में 2,662 और कबीरधाम में 2,234 नाम हटाए गए हैं। इन आंकड़ों को लेकर अकबर ने निर्वाचन आयोग से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। उन्होंने पूछा कि हटाए गए नामों में कितने मामले फॉर्म-7 के आधार पर थे और आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों के बयान कितने मामलों में लिए गए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, क्या उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया? कितने मामलों में आपत्तियां गलत पाई गईं और कितने मामलों में आपत्तिकर्ता ही गलत या फर्जी पाए गए?
धारा 31 के तहत कार्रवाई का भी मांगा हिसाब
मोहम्मद अकबर ने निर्वाचन आयोग से यह जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की कि फॉर्म-7 के जरिए गलत जानकारी या झूठी घोषणा करने वाले लोगों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कितनी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होना जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है।
25 लाख मतदाताओं की कमी पर मांगा जवाब
मोहम्मद अकबर ने अपने बयान में सबसे बड़ा सवाल प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि 2023 से अब तक राज्य की आबादी बढ़ी है, फिर भी मतदाताओं की संख्या में 24 लाख 99 हजार की कमी कैसे आई, निर्वाचन आयोग को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच जीत-हार का अंतर करीब 6 लाख 32 हजार वोट का रहा है, जबकि इसके मुकाबले लगभग चार गुना संख्या में मतदाताओं के कम होने का दावा किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह स्थिति जांच का विषय है।
पात्र मतदाताओं के नाम नहीं हटने की मांग
पूर्व मंत्री ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि SIR के दौरान हटाए गए नामों की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए जाएं। उन्होंने जरूरत पड़ने पर पुरानी मतदाता सूची बहाल करने की भी मांग रखी। मोहम्मद अकबर ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी पात्र नागरिक केवल प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ी के कारण अपने मतदान के अधिकार से वंचित न हो।




