मुंगेली में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन पर बड़ा फैसला : म्यूल अकाउंट इस्तेमाल करने वाले आरोपी को 3 साल की सजा
मुंगेली में साइबर ठगी की 4.53 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम के लेन-देन मामले में कोर्ट ने संजीव खांडे को 3 साल की सश्रम सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया...


मुंगेली। साइबर ठगी से हासिल रकम को बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने के मामले में मुंगेली न्यायालय ने एक आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश मुंगेली गिरिजा देवी मेरावी की अदालत ने आरोपी संजीव खांडे पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
यह मामला सिटी कोतवाली मुंगेली में दर्ज अपराध क्रमांक 77/2025 से संबंधित है। प्रकरण में आरोप था कि आरोपी ने अपने नाम के साथ-साथ परिचितों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन के लिए किया गया।
4.53 करोड़ से ज्यादा रकम के ट्रांजेक्शन का मामला
अभियोजन के अनुसार, संबंधित बैंक खातों के माध्यम से करीब 4 करोड़ 53 लाख 89 हजार 567 रुपये की राशि का लेन-देन हुआ था। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111, 317(2), 317(4), 317(5) और 3(5) के तहत न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों पर न्यायालय ने विचार किया। इसके बाद संजीव खांडे को BNS की धारा 317(2) के तहत दोषी माना गया।
3 साल की सजा और 10 हजार का जुर्माना
कोर्ट ने आरोपी संजीव खांडे को तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, इसी प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामले में कई अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। उनके संबंध में आगे की कार्रवाई की जानी है।
14 गवाहों के जरिए अभियोजन ने रखा पक्ष
प्रकरण में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष कुल 14 गवाह पेश किए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद संजीव खांडे को संबंधित धारा में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।




