16 साल पहले खरीदी जमीन पर कब्जा; सीमांकन के लिए भटक रहीं भाजपा की आदिवासी पार्षद..जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, इकबाल सिंह समेत अन्य लोगों पर जमीन हड़पने की कोशिश का आरोप!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जमीनों की बढ़ती कीमतों के बीच भूमि विवाद के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पेंड्रा में सामने आया है, जहां बिलासपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 59 की भाजपा पार्षद सुनीता जगत ने अपनी जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश और सीमांकन में देरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्षद का आरोप है कि वर्ष 2011 में खरीदी गई उनकी जमीन को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है और अपनी संपत्ति की वास्तविक सीमा स्पष्ट कराने के लिए उन्हें करीब एक साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने इकबाल सिंह समेत अन्य लोगों पर जमीन हड़पने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। सुनीता जगत के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2011 में पेंड्रा के बिलासपुर रोड स्थित रमेश कोल से खसरा नंबर 2480/1 से संबंधित 16 डिसमिल जमीन खरीदी थी। जमीन खरीदने के बाद उन्होंने वहां झोपड़ी बनवाई और अपने नाम से बिजली मीटर भी लगवाया था। उनका कहना है कि जमीन भविष्य के लिए खरीदी गई थी, लेकिन अब इसकी सुरक्षा और सीमाओं को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पार्षद का आरोप है कि उनकी जमीन के आगे और पीछे की ओर कब्जे की स्थिति बन रही है। ऐसे में उन्हें आशंका है कि कहीं उनकी खरीदी हुई जमीन पर अवैध कब्जा न हो जाए। उनका कहना है कि जमीन का नियमानुसार सीमांकन होने से वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सकेगी और विवाद की स्थिति का समाधान निकालने में मदद मिलेगी। पार्षद सुनीता जगत का आरोप है कि क्षेत्र में जमीन की कीमतें बढ़ने के साथ ही उनकी संपत्ति को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने इकबाल सिंह समेत अन्य लोगों पर कथित तौर पर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्षों पहले खरीदी गई जमीन को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अब प्रशासन से गुहार लगानी पड़ रही है। हालांकि, जमीन पर कब्जे की कोशिश और इसके पीछे की मंशा को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एक साल से सीमांकन की मांग, फिर भी समाधान नहीं मिलने का दावा…..
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल जमीन के सीमांकन को लेकर है। सुनीता जगत का कहना है कि वह लगभग एक साल से संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी जमीन का सीमांकन कराने की मांग रख रही हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं हुआ है। उनके अनुसार, सीमांकन होने से जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है और भविष्य में विवाद बढ़ने की आशंका को भी कम किया जा सकता है। इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
