बस्तर में बाढ़ से खेती चौपट : मुआवजे के लिए किसानों की गुहार, BKS ने प्रति एकड़ ₹65,100 देने की उठाई मांग
बस्तर में बाढ़ से फसल बर्बाद होने पर भारतीय किसान संघ ने ₹65,100 प्रति एकड़ मुआवजा, कर्जमाफी और कृषि उपकरणों के नुकसान की भरपाई की मांग की.....
जगदलपुर। बस्तर में बाढ़ का पानी उतरने के बाद किसानों के सामने नुकसान की भरपाई और खेती को फिर से शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है। इंद्रावती नदी के आसपास बसे गांवों में बाढ़ ने धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। कई खेतों में रेत जमा होने से जमीन को दोबारा खेती के लायक बनाना मुश्किल हो गया है। प्रभावित किसान अब राहत और मुआवजे की मांग लेकर जगदलपुर कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं। भारतीय किसान संघ (BKS) ने सरकार से किसानों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
फसल बर्बादी पर प्रति एकड़ ₹65,100 मुआवजा मांगा
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष नील कुमार बघेल के अनुसार, डोंगाघाट, छेपड़ागुड़ा, बकावांड, गुड़ापुड़ा, तारापुर और बजावंड सहित इंद्रावती नदी के किनारे के कई इलाकों में किसानों को नुकसान हुआ है। बाढ़ के पानी ने धान की फसल प्रभावित की, वहीं खेतों में रेत भरने से आगामी खेती की तैयारी भी कठिन हो गई है। किसान संघ ने मांग की है कि प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान के समर्थन मूल्य के आधार पर 65,100 रुपये मुआवजा दिया जाए। संगठन का कहना है कि राहत राशि ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसान फसल बर्बादी के बाद पैदा हुए आर्थिक संकट से उबर सकें और अगली फसल के लिए जरूरी इंतजाम कर सकें।
कर्जमाफी, मकानों और कृषि उपकरणों के लिए भी राहत की मांग
फसल नुकसान के अलावा भारतीय किसान संघ ने किसानों के कृषि ऋण माफ करने की मांग भी उठाई है। इसमें किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए गए कर्ज के साथ अन्य कृषि ऋणों को शामिल करने की मांग की गई है। इसके अलावा बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए पर्याप्त मुआवजा और खराब हुए कृषि उपकरणों की भरपाई की मांग रखी गई है। किसान संघ ने फसल बीमा की राशि सात दिनों के भीतर जारी करने की मांग भी की है। किसानों के सामने फसल खराब होने से आय का संकट है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाने, कर्ज चुकाने और अगली फसल की तैयारी के लिए पूंजी जुटाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
मकान क्षति के लिए 25 करोड़ रुपये जारी, फसल सर्वे जारी
किसानों की मांगों के बीच प्रशासन ने राहत कार्यों को लेकर जानकारी दी है। अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल के मुताबिक, बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के मुआवजे के लिए 25 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि फसल नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे जारी है। कुछ तहसीलों के प्रकरण ट्रेजरी में भेजे जा रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि एक से दो सप्ताह के भीतर किसानों को फसल क्षति की सहायता राशि मिलनी शुरू हो सकती है।
अगली खेती के लिए राहत राशि पर टिकी किसानों की नजर
बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए अब सबसे बड़ी चिंता अगली फसल की तैयारी है। जिन खेतों में रेत भर गई है, उन्हें फिर से खेती योग्य बनाने के लिए अतिरिक्त मेहनत और खर्च करना पड़ेगा। वहीं, धान की फसल गंवा चुके किसानों को आर्थिक सहायता के बिना खेती शुरू करने में परेशानी हो सकती है।
