सेंदरी की 4 एकड़ जमीन पर बड़ा खेल; 21 लाख एडवांस लेकर दूसरे को बेचने की कोशिश का आरोप, न्यायालय में लंबित मामला..संभावित खरीदारों को सूचना जारी कर किया गया सतर्क!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत सेंदरी में 4 एकड़ से अधिक जमीन की खरीदी-बिक्री को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि जमीन का पक्का अनुबंध होने और 21 लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में दिए जाने के बावजूद उसी भूमि को दूसरे लोगों के हाथों बेचने की कोशिश की जा रही है। पूर्व अनुबंध और भुगतान को लेकर उठे इस विवाद के बीच मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में प्रार्थी पक्ष ने सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर संभावित खरीदारों को जमीन के विवाद से अवगत कराते हुए सतर्क रहने की अपील की है। मामला सेंदरी मुख्य मार्ग से 300 मीटर भीतर स्थित पटवारी हल्का नंबर 16 की भूमि से जुड़ा है। विवादित जमीन में खसरा नंबर 1204 सहित कुल 10 खसरा नंबरों की 4 एकड़ से अधिक भूमि शामिल बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उक्त जमीन पूर्व में स्वर्गीय अशोक भीमनानी के स्वामित्व एवं आधिपत्य में थी। बताया गया है कि इस भूमि की खरीदी के लिए स्वर्गीय मनोज अग्रवाल के साथ पक्का अनुबंध 2006 में किया गया था। प्रार्थी पक्ष के अनुसार, अनुबंध के तहत तीन किस्तों में 10 लाख, 7 लाख और 4 लाख रुपये, यानी कुल 21 लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में दिए गए थे। ऐसे में जमीन की प्रस्तावित बिक्री को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
अग्रिम भुगतान के बाद भी बिक्री की कोशिश का आरोप……
प्रार्थी पक्ष का आरोप है कि जमीन के संबंध में पहले से अनुबंध होने और अग्रिम राशि का भुगतान किए जाने की जानकारी को सामने लाए बिना भूमि को अन्य व्यक्तियों को बेचने की कोशिश की जा रही है। वर्तमान में संबंधित भूमि अशोक भीमनानी के वारिसान और लता कुंगवानी के नाम पर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसी आधार पर प्रार्थी पक्ष ने सार्वजनिक सूचना जारी कर जमीन खरीदने के इच्छुक लोगों को आगाह किया है कि वे भूमि से संबंधित दस्तावेजों, पूर्व अनुबंध और न्यायालय में लंबित मामले की स्थिति की जानकारी प्राप्त किए बिना खरीदी-बिक्री का कोई निर्णय न लें।
न्यायालय में मामला लंबित, खरीदारों की बढ़ी चिंता……
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू जमीन के पूर्व अनुबंध, कथित अग्रिम भुगतान और वर्तमान स्वामित्व के बीच उत्पन्न विवाद है। एक ओर प्रार्थी पक्ष पूर्व अनुबंध के आधार पर अपने दावे की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीन की मौजूदा स्थिति और प्रस्तावित बिक्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल मामला न्यायालय में लंबित बताया गया है। ऐसे में जमीन के स्वामित्व, अनुबंध की वैधता और खरीदी-बिक्री से जुड़े अधिकारों पर अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही स्पष्ट होगी। सार्वजनिक सूचना के माध्यम से प्रार्थी पक्ष ने संभावित खरीदारों से अपील की है कि वे विवाद की पूरी जानकारी लेकर ही कोई कदम उठाएं, ताकि भविष्य में कानूनी उलझनों से बचा जा सके।
