पत्नी को उचित नोटिस दिए बिना तलाक की डिक्री पर हाईकोर्ट सख्त : फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द, 12 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
बिलासपुर में पत्नी को समुचित नोटिस दिए बिना एकतरफा तलाक की डिक्री पारित करने के मामले में हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा- सुनवाई का मौका दिए बिना फैसला नहीं हो सकता....

बिलासपुर। पत्नी को कानूनी रूप से समुचित नोटिस दिए बिना पारित की गई एकतरफा तलाक की डिक्री को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उचित प्रक्रिया के खिलाफ माना है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी पक्ष को नोटिस देने के लिए अखबार में प्रकाशन सीधे तौर पर पहला विकल्प नहीं हो सकता। सामान्य तरीके से समन की तामील का प्रयास किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति के घर पर नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया भी अपनानी होगी। इन प्रक्रियाओं के विफल होने के बाद ही अखबार में नोटिस प्रकाशित करना अंतिम उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक बार नोटिस लौटा तो सीधे अखबार में प्रकाशन
मामला सूरजपुर निवासी एक महिला से जुड़ा है। उसके पति ने 9 जनवरी 2024 को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पत्नी के बताए पते पर पंजीकृत डाक के माध्यम से नोटिस भेजा, लेकिन पता सही नहीं होने के कारण नोटिस वापस लौट आया। इसके बाद पति की ओर से अखबार में नोटिस प्रकाशित कराने का आवेदन दिया गया। फैमिली कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए 29 फरवरी 2024 को स्थानीय अखबार में नोटिस प्रकाशित करा दिया। पत्नी की ओर से इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
नोटिस चस्पा कराने का रिकॉर्ड नहीं मिला
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान CPC के आदेश 5 के नियम 17 और 20 का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल एक बार नोटिस वापस आने के बाद सीधे अखबार में प्रकाशन की प्रक्रिया अपनाई गई। रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह पता चले कि पत्नी के घर पर नोटिस चस्पा कराने का प्रयास किया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि फैमिली कोर्ट ने यह मान लिया कि पत्नी जानबूझकर नोटिस लेने से बच रही थी, लेकिन रिकॉर्ड में इस निष्कर्ष के समर्थन में पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए बिना अखबार में नोटिस प्रकाशित करना उचित नहीं था।
पत्नी ने कहा- तलाक की कार्यवाही की जानकारी ही नहीं थी
महिला का कहना था कि उसे पति द्वारा दायर तलाक के मामले की जानकारी नहीं थी। उसके अनुसार, 18 नवंबर 2024 को औरंगाबाद में चल रहे भरण-पोषण संबंधी मामले की काउंसलिंग के दौरान उसे पहली बार एकतरफा तलाक की डिक्री के बारे में पता चला। इसके बाद महिला ने डिक्री की प्रमाणित प्रति हासिल की और 2 दिसंबर 2024 को फैमिली कोर्ट में एकतरफा तलाक की डिक्री को रद्द करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
25 अप्रैल 2024 को पारित हुई थी एकतरफा डिक्री
पत्नी के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने के बाद फैमिली कोर्ट ने 25 अप्रैल 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री पारित कर दी थी। हाईकोर्ट ने मामले में हुई देरी को लेकर पत्नी की ओर से दाखिल आवेदन को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 23 जून 2025 के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया है।
12 अक्टूबर को फैमिली कोर्ट में उपस्थित होने के दिए निर्देश
अब फैमिली कोर्ट पत्नी की ओर से एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने के लिए दिए गए आवेदन पर दोबारा सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को 12 अक्टूबर को फैमिली कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

