कांकेर में नक्सली डंप की 20 लाख की नकदी को लेकर बवाल : दो तत्कालीन DSP पर रकम बांटने का आरोप, जांच रिपोर्ट पर सस्पेंस
कांकेर में नक्सली डंप की तलाशी के दौरान 20 लाख की नकदी मिलने और दो तत्कालीन DSP पर रकम बांटने के आरोप की जांच हुई। रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी गई है....

कांकेर। नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में नक्सली डंप की तलाशी के दौरान बरामद करीब 20 लाख रुपये की नकदी को लेकर पुलिस विभाग में सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मार्च-अप्रैल 2026 में मूरागांव क्षेत्र के जंगलों में हुई तलाशी के दौरान मिली रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय तत्कालीन दो DSP ने आपस में बांट लिया।
मामला पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर जांच कराए जाने की बात सामने आई है। हालांकि जांच में क्या निष्कर्ष निकला और संबंधित अधिकारियों पर कोई कार्रवाई प्रस्तावित हुई है या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
दो अलग-अलग जंगलों से रकम मिलने का दावा
जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन DSP की टीम मूरागांव ग्राम पंचायत के आश्रित गांव टोण्डामरका और मरकाकोनारी के जंगलों में नक्सली डंप की तलाश के लिए गई थी। बताया जा रहा है कि सर्च ऑपरेशन के दौरान टोण्डामरका से करीब 15 लाख और मरकाकोनारी से करीब 5 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आई। इस तरह कुल रकम करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है। हालांकि नकदी की बरामदगी और उसके कथित बंटवारे को लेकर स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
SP तक पहुंची शिकायत, जांच रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी गई
मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद जांच कराई गई। SP निखिल राखेचा ने शिकायत मिलने और जांच कराए जाने की पुष्टि की है। उनके मुताबिक जांच पूरी कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। हालांकि रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आए, आरोप सही पाए गए या नहीं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर पुलिस अधीक्षक ने विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
20 लाख या 22 करोड़? अफवाह ने बढ़ाया मामला
इधर इस प्रकरण को लेकर क्षेत्र में एक और चर्चा भी चल रही है। दावा किया जा रहा है कि बरामद रकम 20 लाख रुपये नहीं बल्कि करीब 22 करोड़ रुपये थी। हालांकि 22 करोड़ रुपये की बरामदगी की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। तत्कालीन दोनों DSP के कांकेर से तबादले के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया है। फिलहाल जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के पास होने की बात सामने आई है और विभागीय स्तर पर आगे के निर्णय का इंतजार है।

