बिलासपुर में चौकीदार हत्याकांड पर उबाल; बाल संप्रेक्षण गृह के बाहर धरना जारी, दोषी अधिकारियों के निलंबन और 1 करोड़ मुआवजे की मांग!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) नूतन चौक स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में संविदा चौकीदार नरेंद्र खांडे की हत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार सुबह 7 बजे से मृतक के परिजन, सतनामी समाज और भीम आर्मी के कार्यकर्ता बाल संप्रेक्षण गृह के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठे हैं। आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी भी धरने में शामिल हुई। आप पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने आरोप लगाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में भी इसी बाल संप्रेक्षण गृह में एक नाबालिग की मौत हुई थी, लेकिन उस समय मामले को दबा दिया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि वर्तमान जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुरेश सिंह उस समय भी पदस्थ थे, फिर भी विभाग ने कोई सबक नहीं लिया, जिसके कारण एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक सामने आई। मृतक की पत्नी सीमा खांडे ने बताया कि नरेंद्र खांडे का मार्च महीने में दूसरे स्थान पर तबादला हो चुका था, लेकिन बाल संप्रेक्षण गृह की प्रभारी अधिकारी सुजाता हालदार ने उन्हें यहीं रोके रखा। उन्होंने यह भी बताया कि गृह में करीब 50 बाल अपचारी हैं, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए केवल दो चौकीदार तैनात थे। उनके जेठ श्यामलाल खांडे दिन की ड्यूटी करते हैं और नरेंद्र रात की ड्यूटी पर रहते थे। धरनारत परिजनों और समर्थकों ने महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दोषी अधिकारियों, सुरेश सिंह सहित संबंधित स्टाफ पर कार्रवाई और निलंबन की मांग की है। आंदोलनकारियों ने मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी, एफआईआर की प्रति, सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, मृतक के बच्चों की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाने तथा लापरवाह अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक बाल संप्रेक्षण गृह के मुख्य द्वार पर उनका धरना जारी रहेगा।
