बिलासपुर; फर्जी डॉक्टर मामले में अपोलो प्रबंधन को पुलिस की क्लीन चिट..सीबीआई जांच की मांग तेज, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने जांच पर उठाए सवाल!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) अपोलो अस्पताल एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। अस्पताल में वर्ष 2006 के दौरान कार्यरत रहे कथित फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ एन जॉन केम से जुड़े मामले में पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। जांच के दौरान पुलिस ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी है। हालांकि इस फैसले के बाद जांच की निष्पक्षता और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। पुलिस के अनुसार जांच में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि अपोलो अस्पताल प्रबंधन या चयन समिति ने किसी आपराधिक षड्यंत्र के तहत जानबूझकर फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव की नियुक्ति की थी। इसी आधार पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की गई। जानकारी के अनुसार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का वर्ष 2002 से 2006 के बीच अपोलो अस्पताल में कई बार उपचार हुआ था। 1 जून 2006 को नरेंद्र विक्रमादित्य यादव की अस्पताल में नियुक्ति हुई। 21 जुलाई 2006 को सांस लेने में तकलीफ के बाद राजेंद्र प्रसाद शुक्ल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विभिन्न विशेषज्ञों के साथ नरेंद्र यादव भी इलाज में शामिल रहा। 2 अगस्त 2006 को उसने एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की। प्रक्रिया के कुछ घंटों बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। 20 अगस्त 2006 को 18 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद उनका निधन हो गया। करीब 19 वर्ष बाद, अप्रैल 2025 में शुक्ल के पुत्र डॉ. प्रदीप शुक्ल को जानकारी मिली कि उनके पिता का इलाज करने वाला डॉक्टर मध्यप्रदेश के दमोह में फर्जी डिग्री के मामले में गिरफ्तार हुआ है। इसके बाद उन्होंने सरकंडा थाने में फर्जी डॉक्टर और अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद 19 अप्रैल 2025 को आरोपी डॉक्टर सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और गैर इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।
परिजनों ने उठाए सवाल…..
पुलिस द्वारा अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दिए जाने पर स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल ने नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों की सही जांच की होती तो एक कथित फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज नहीं कर पाता। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण कई मरीजों की जान गई, इसलिए उसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। परिजनों ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
कानूनी विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल…...
मामले पर कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी अस्पताल में मरीज सीधे डॉक्टर के पास नहीं जाता, बल्कि अस्पताल प्रबंधन ही डॉक्टर उपलब्ध कराता है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया और डॉक्टर की योग्यता की जांच की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है। इसलिए प्रबंधन की भूमिका की गहन जांच आवश्यक है। फिलहाल पुलिस जांच पूरी कर न्यायालय में चालान पेश कर चुकी है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन को मिली क्लीन चिट और पीड़ित परिवार की सीबीआई जांच की मांग के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
