बिलासपुर; अपोलो हॉस्पिटल पर गंभीर मरीज की शिफ्टिंग में लापरवाही का आरोप: कांग्रेस ने 7 दिन का दिया अल्टीमेटम; एयर एंबुलेंस तक पहुंचाने में अव्यवस्था का आरोप, एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद मरीज हैदराबाद रवाना, कांग्रेस ने जांच और कार्रवाई की उठाई मांग!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) शहर के अपोलो हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पीडब्ल्यूडी में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल की गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान कथित लापरवाही और अव्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को जिला कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल पहुंचकर प्रबंधन से जवाब-तलब किया और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि तय समय में सुधार नहीं होने पर सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीडब्ल्यूडी कर्मचारी राजकुमार अग्रवाल लगभग 12 दिन पहले दोस्तों के साथ कोलकाता घूमने गए थे। वहां उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बिलासपुर लौटने के बाद स्थानीय स्तर पर उपचार कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर चार दिन पहले उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी। परिजनों ने तत्काल करीब 13 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की, जो बुधवार शाम करीब 6 बजे चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच गई। आरोप है कि मरीज को एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने अपनी एंबुलेंस उपलब्ध कराने के बजाय निजी एंबुलेंस का इंतजाम करने को कहा। परिजनों का यह भी आरोप है कि मरीज के साथ अस्पताल का कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ नहीं भेजा गया और न ही एयर एंबुलेंस में आवश्यक लाइफ सपोर्ट उपकरणों की उपलब्धता का समुचित परीक्षण किया गया। बताया गया कि एयरपोर्ट पहुंचने तक मरीज का ऑक्सीजन स्तर गंभीर रूप से गिर गया, जिसके बाद हैदराबाद से आई एयर एंबुलेंस की मेडिकल टीम ने मरीज को ले जाने से इनकार कर दिया। मरीज को दोबारा अपोलो अस्पताल लाना पड़ा। इस देरी के कारण परिजनों को एयर एंबुलेंस का करीब दो लाख रुपये अतिरिक्त हैंडलिंग चार्ज भी देना पड़ा। मामले को गंभीर मानते हुए पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विजय केशरवानी ने लगातार दूसरे दिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से मुलाकात कर शिकायत की। कांग्रेस का दावा है कि एसएसपी के हस्तक्षेप और अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाने के बाद ही मरीज को हैदराबाद भेजा जा सका। इसके बाद मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए हैदराबाद से तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की विशेष टीम और फेफड़ों को सुरक्षित रखने वाले विशेष उपकरण मंगाए गए, जिस पर करीब सात लाख रुपये अतिरिक्त खर्च हुए। गुरुवार को दिनभर मरीज की स्थिति स्थिर करने के बाद शाम करीब सात बजे एयर एंबुलेंस से उसे हैदराबाद रवाना किया गया। इस बार भी निजी एंबुलेंस का उपयोग किया गया, लेकिन हैदराबाद की मेडिकल टीम ने पहले एंबुलेंस की पूरी जांच के बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी। परिजनों के अनुसार अब तक अस्पताल में इलाज पर लगभग 2.87 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि एयर एंबुलेंस और अन्य व्यवस्थाओं सहित कुल खर्च करीब 23 लाख रुपये पहुंच गया। शुक्रवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद नायक के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल मरीज के परिजनों के साथ अपोलो अस्पताल पहुंचा। अस्पताल प्रबंधन के साथ बंद कमरे में लंबी चर्चा हुई, जिसमें कांग्रेस नेताओं ने कई सवाल उठाए। इस दौरान मरीज के भाई ने आरोप लगाया कि अस्पताल की स्वयं की एंबुलेंस पिछले तीन महीनों से उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि गंभीर मरीजों की शिफ्टिंग जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में इस प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है।
