बिलासपुर; बिजली बिलों में लगा ‘करंट’: 45 लाख उपभोक्ताओं पर बढ़े बिलों का बोझ: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली उपभोक्ताओं को जून माह के बढ़े हुए बिजली बिलों ने झटका दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ के 45 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल औसत से दो से तीन गुना तक बढ़कर आए हैं, जिससे आम जनता आर्थिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी ने इसे भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों का परिणाम बताते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार बनने के बाद से लगातार पांचवीं बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है। पार्टी के अनुसार, जनता को राहत देने के बजाय सरकार महंगाई का अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
तीन कारणों को बताया जिम्मेदार……
कांग्रेस ने बढ़े हुए बिजली बिलों के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं। पहला, घरेलू और अन्य श्रेणियों में बिजली की मूल दरों में वृद्धि। दूसरा, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ‘बिजली बिल हाफ योजना’ को बंद कर देना, जिसके तहत 400 यूनिट तक बिजली खपत पर उपभोक्ताओं को आधा बिल भरना पड़ता था। तीसरा और सबसे बड़ा कारण प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर को बताया गया है। पार्टी का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उपभोक्ताओं की बिजली खपत वास्तविक उपयोग से अधिक दर्ज की जा रही है। सामान्य मीटरों की तुलना में स्मार्ट मीटर तेज गति से रीडिंग दिखा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के बिल अनियंत्रित रूप से बढ़ रहे हैं।
ऑनलाइन और ऑफलाइन बिलों में अंतर का आरोप……….
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कई उपभोक्ताओं को एक ही माह में ऑनलाइन और ऑफलाइन अलग-अलग बिल जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा, बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं की सहमति के बिना उनके बिजली खपत का सेंक्शंड लोड बढ़ाया जा रहा है और निर्धारित भार से अधिक उपयोग का हवाला देकर अतिरिक्त अर्थदंड जोड़कर बिल भेजे जा रहे हैं।
बिजली दरों में बढ़ोतरी पर उठाए सवाल…….
पार्टी के अनुसार, हाल ही में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट, गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तथा किसानों के सिंचाई पंपों की बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि की गई है। इसके साथ ही 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार भी लगाया गया है। कांग्रेस ने दावा किया कि उसके पांच वर्षीय कार्यकाल में केवल एक बार महज 2 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार कुछ ही समय में कई बार बिजली दरें बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।
स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग…….
कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश की जनता एक ओर अघोषित बिजली कटौती से परेशान है तो दूसरी ओर बढ़े हुए बिजली बिलों से त्रस्त है। पार्टी ने मांग की है कि जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में जनहित को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा और वापसी की पहल की गई, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार भी स्मार्ट मीटर को तत्काल वापस ले और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करे। हालांकि, बिजली विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में बढ़े हुए बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
