स्मार्ट मीटर नहीं, अदाणी मीटर; बिलासपुर में कांग्रेस का सरकार पर हमला..जनआंदोलन का ऐलान, घर-घर जाकर भरवाए जाएंगे शिकायत फॉर्म, कांग्रेस बोली- स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म कराकर ही लेंगे दम!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। शनिवार को कांग्रेस भवन में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर जनहित में व्यापक जनआंदोलन चलाएगी और घर-घर जाकर लोगों की शिकायतें दर्ज कराएगी। सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता प्रत्येक घर तक पहुंचकर स्मार्ट मीटर से परेशान उपभोक्ताओं के आवेदन भरवाएंगे। उन्होंने दावा किया कि समय पर मीटर रीडिंग नहीं होने से उपभोक्ताओं का बिजली बिल अलग-अलग स्लैब में पहुंच जाता है, जिससे उन्हें मिलने वाली छूट समाप्त हो जाती है और आम लोगों को अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्मार्ट मीटर को लेकर फैसले लिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार स्वयं इस व्यवस्था को लागू नहीं कर रही है, तो छत्तीसगढ़ में इसे क्यों लागू किया जा रहा है। सिद्धांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि यह स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि अदाणी मीटर है और इसे निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के साथ खड़ी है और स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता समाप्त कराने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कथित रूप से कहा गया था कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि केंद्र ऐसा कह रहा है तो प्रदेश के अधिकारी इसे अनिवार्य क्यों बता रहे हैं। प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने उपभोक्ताओं की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया। पार्टी का कहना है कि शिकायत मिलने पर कांग्रेस कार्यकर्ता संबंधित उपभोक्ता के घर पहुंचकर उनकी समस्या सुनेंगे और आवश्यक आवेदन भरवाने में मदद करेंगे। पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले सरकार को जनसुनवाई करनी चाहिए थी, लेकिन स्मार्ट मीटर का निर्णय बिना व्यापक जनसहमति के लागू कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोगों के पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन नहीं हैं, ऐसे में डिजिटल माध्यम से बिजली बिल प्राप्त करना उनके लिए मुश्किल है। उन्होंने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके घर छह घंटे तक बिजली बाधित रही और एप आधारित व्यवस्था के कारण समय पर बिल संबंधी जानकारी भी नहीं मिल सकी। प्रेसवार्ता में कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष विजय पांडे, केशरवानी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
