मस्तूरी; जनसहयोग से बदली स्कूल की तस्वीर: 5 लाख की लागत से बने दो अतिरिक्त कक्ष, अब एक पाली में होगी पढ़ाई!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) मस्तूरी शासन स्तर पर लंबे समय तक मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने मिलकर शिक्षा के प्रति अनूठी मिसाल पेश की है। मस्तूरी विकासखंड के ग्राम बुढ़ीखार स्थित शासकीय सरदार तारासिंह बुद्धसिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जनसहयोग से लगभग 5 लाख रुपये की लागत से दो अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया गया है। नए शिक्षा सत्र से इन कक्षों में विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई शुरू होगी, जिससे वर्षों से चली आ रही कक्षाओं की समस्या का समाधान हो सकेगा। मल्हार क्षेत्र के इस सबसे पुराने हायर सेकेंडरी स्कूल में आसपास के 20 से अधिक गांवों के छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं। भवन और कक्षों की कमी के कारण विद्यार्थियों को बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिल पाती थी। विषय शिक्षक उपलब्ध होने के बावजूद गणित और कॉमर्स की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही थीं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। विद्यालय के प्राचार्य कांशीराम रजक ने बताया कि वर्ष 2022 से लगातार नए भवन और अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे थे। जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से लोक शिक्षण संचालनालय को प्रस्ताव भेजा गया तथा विभिन्न स्तरों पर आवेदन और निवेदन भी किए गए, लेकिन अपेक्षित स्वीकृति नहीं मिल सकी। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरपंच और शाला विकास समिति के सदस्यों ने तत्कालीन कलेक्टर से भी अतिरिक्त कक्ष निर्माण की मांग की थी। अनुमोदन मिलने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि विद्यालय के पुराने भवनों की स्थिति भी जर्जर थी। बरसात के दौरान छत से पानी टपकता था और बिजली करंट आने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती थीं। ऐसे में जनसहयोग से छत की मरम्मत कराई गई तथा एक जर्जर कक्ष को आंशिक रूप से सुधारकर अध्यापन योग्य बनाया गया।
गणतंत्र दिवस पर लिया गया ऐतिहासिक निर्णय…….
26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्राचार्य कांशीराम रजक ने शाला विकास समिति, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के समक्ष बच्चों के हित में स्वयं आर्थिक सहयोग कर दो अतिरिक्त कक्षों के निर्माण का प्रस्ताव रखा। उपस्थित सरपंच, पंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य और समिति के सदस्यों ने तत्काल सहमति देते हुए चंदा एकत्र करने का निर्णय लिया। इसके बाद जनसहयोग से निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और एक वर्ष के भीतर दो नए कक्ष तैयार कर लिए गए।
अब एक पाली में होगी पढ़ाई……..
शाला विकास समिति के सदस्यों की मंशा के अनुरूप नए शिक्षा सत्र से विद्यालय में दो पालियों के बजाय एक ही पाली में कक्षाएं संचालित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी और उच्च कार्यालय से अनुमति हेतु आवेदन भेजा जा चुका है। कभी असामाजिक तत्वों का अड्डा माने जाने वाला यह विद्यालय आज चारदीवारी, सीसीटीवी कैमरों और बेहतर शैक्षणिक वातावरण से सुसज्जित होकर विद्यार्थियों के स्वागत के लिए तैयार है। बुढ़ीखार के ग्रामीणों का यह प्रयास शिक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।जरूरत हो तो इस खबर का संक्षिप्त अखबारी संस्करण, वेब पोर्टल स्टाइल, या आकर्षक फ्रंट पेज हेडलाइन के साथ संस्करण भी तैयार किया जा सकता है।
