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बिलासपुर; हरिओम हॉस्पिटल पर मरीज की मौत के बाद शव रोकने का आरोप..अस्पताल प्रबंधन ने कहा- नियमों के तहत नहीं सौंपा शव; कांग्रेसियों ने की FIR की मांग!

बिलासपुर: (प्रांशु ठाकुर) बिलासपुर में एक आदिवासी महिला की मौत के बाद शव परिजनों को नहीं सौंपे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर हरिओम हॉस्पिटल प्रबंधन और डॉ. अभिषेक कश्यप के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने शव को बंधक बनाए रखने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि पुलिस को सूचना देने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के कारण शव परिजनों को तत्काल नहीं सौंपा जा सका। प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरिया जिले के ग्राम नेउर, थाना कोराडोल निवासी आदिवासी महिला तिलबसिया पेड़ काटने के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। परिजनों के अनुसार उन्हें 25 जुलाई को बिलासपुर के हरिओम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि महिला की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव परिजनों को देने से इनकार किया और कथित रूप से बकाया राशि जमा करने की शर्त रखी। ज्ञापन में दावा किया गया है कि परिजनों से करीब 84 हजार रुपये की राशि जमा करने को कहा गया, जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि मृतका के परिजनों ने उपचार के दौरान 21,780 रुपये जमा किए थे और महिला का आयुष्मान कार्ड भी बना हुआ था। कांग्रेस ने पूरे मामले की जांच कर अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मजिस्ट्रियल जांच कराने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष; शव बंधक बनाने का आरोप गलत……

वहीं हरिओम हॉस्पिटल के डॉ. अभिषेक कश्यप ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि महिला को 25 जुलाई को पेड़ से गिरने के बाद बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और उसे सीधे आईसीयू में भर्ती किया गया। अस्पताल की ओर से उसी दिन तोरवा पुलिस को भी सूचना दी गई थी। डॉ. कश्यप के मुताबिक महिला की हालत लगातार बिगड़ रही थी और परिजनों की दिन में कई बार काउंसलिंग कर उन्हें मरीज की स्थिति की जानकारी दी जा रही थी। उनका दावा है कि 28 जुलाई को मरीज की हालत ज्यादा खराब होने के बाद काउंसलिंग के दौरान मौके पर मौजूद परिजन अस्पताल से चले गए और इसके बाद उनसे संपर्क करने के कई प्रयास किए गए। अस्पताल प्रबंधन ने नजदीकी थाने को भी इसकी जानकारी दी। डॉ. कश्यप ने बताया कि महिला की 29 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे मौत हुई। इसके बाद अस्पताल की ओर से पुलिस को डेथ एमएलसी की सूचना दी गई। उन्होंने कहा कि अस्पताल के पास मृतक के परिजनों का पता लेकर खुद उनके घर जाने का अधिकार नहीं है और पुलिस की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शव सौंपा जा सकता है।

बिल करीब 80 हजार, सिर्फ 5 हजार जमा……

अस्पताल प्रबंधन ने भुगतान को लेकर भी कांग्रेस के दावे पर सवाल उठाया है। डॉ. अभिषेक कश्यप के अनुसार उपचार और अन्य खर्च मिलाकर करीब 80 हजार रुपये का बिल बना है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता द्वारा बताए गए 21 हजार रुपये के भुगतान में फार्मेसी का बिल भी शामिल है, जबकि अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार अस्पताल में करीब 5 हजार रुपये ही जमा किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शव को बंधक बनाकर रखने का आरोप बिल्कुल गलत है। पुलिस की प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी भी व्यक्ति को शव सौंपना नियमों के अनुसार संभव नहीं है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि 29 जुलाई की रात करीब 12 बजे मृतका के परिजन अस्पताल पहुंचे और शव सौंपने की मांग की। डॉ. कश्यप के मुताबिक अस्पताल के पास उस समय भी पुलिस की आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए बिना शव सौंपने का अधिकार नहीं था और इस संबंध में अस्पताल के पास सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों के दावे सामने आए हैं। कांग्रेस ने जहां अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर और मजिस्ट्रियल जांच की मांग की है, वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस की कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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