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कोयले की धूल से बेहाल ग्रामीण: साइडिंग बंद कराने अनिश्चितकालीन धरना शुरू; सांस लेने में हो रही परेशानी, ‘धूल मुक्त गांव-स्वस्थ जीवन’ की मांग तेज!

कोरबा: (प्रांशु क्षत्रिय) कुसमुंडा कोयले की उड़ती धूल से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। SECL सुराकछार की रेलवे साइडिंग से लगातार फैल रही कोयले की महीन धूल के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण पंखा दफाई रेलवे फाटक पर एकत्रित हुए और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने साइडिंग को बंद करने तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली कोयले की धूल ने प्रेम नगर, पंखा दफाई, भेरोताल, सुराकछार और भक्तु दफाई सहित आसपास के गांवों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। धूल घरों की छतों, कपड़ों और खाद्य सामग्री तक पहुंच रही है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धरना स्थल पर ग्रामीणों ने ‘धूल मुक्त गांव, स्वस्थ जीवन’ के नारे लगाते हुए प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बच्चे स्कूल जाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, जबकि बुजुर्गों और अन्य लोगों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ और दमा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई….

नगर निगम पार्षद प्रेम कुमार साहू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पहले जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की मांग की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की मांग……

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि रेलवे साइडिंग में 24 घंटे वाटर स्प्रिंकलर, मिस्ट गन और फॉग कैनन जैसी व्यवस्थाएं शुरू की जाएं तथा कोयला लोडिंग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि जब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा।

लिखित आश्वासन पर अड़े ग्रामीण…..

धरने की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। हालांकि ग्रामीण लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हैं।

स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर……..

चिकित्सकों के अनुसार, कोयले की धूल में मौजूद सिलिका और कार्बन के सूक्ष्म कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से दमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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