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दर्राभाठा में श्रीमद भागवत कथा का चल रहा आयोजन….! चौथे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव में श्रद्धालुओं के जयकारों से गुंज उठा पंडाल…?

सीपत:- (प्रांशु क्षत्रिय) क्षेत्र के ग्राम दर्राभाठा में आयोजित श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चौथे दिन पं. श्री राजू जी महाराज ने व्यास पीठ से कृष्ण जन्मोत्सव, राम कथा, प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार की कथा विस्तार से सुनाई। जैसे ही कथा के दौरान कृष्ण जन्म का प्रसंग आया और कथा पंडाल में भगवान कृष्ण के रूप में बालक वासुदेव के रूप में एक व्यक्ति मथुरा से गोकुल पहुंचने का अभिनय करते हुए मंच की ओर बढ़ने लगे, वैसे ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। यजमान तुलसी राम साहू व श्रीमती शैला बाई साहू ने कृष्ण व वासुदेव की अगवानी करते हुए कथा मंच पर ले गए।

कृष्ण जन्मोत्सव का गीत जैसे ही कथा वाचक पं. श्री राजू जी महाराज ने शुरू किया हजारों की संख्या में श्रद्धालु झूमकर नाचने लगे। वहीं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने और कान्हा का दर्शन करने श्रद्धालुओं की भीड़ कथा पंडाल पर उमड़ी पड़ी। पं. श्री राजू जी महाराज ने सूत द्वारा बोली गई कथा के प्रसंग में कहा कि एक पिता ने गौरा नामक बालक को विद्वान और ज्ञानी बनाने गुरुकुल में छोड़ा। गौरा पढ़ाई में कमजोर था, लेकिन गुरुओं की सेवा बड़े ही मन लगाकर करता था। गुरु ने गौरा को गाय चराने भेज दिया। रास्ते में एक व्यक्ति ने गौरा से कहा कि जो कोई गाय चराने ले जाता है, उसकी सेवा करता है, उसे भगवान मिल जाता है। उस व्यक्ति ने गौरा से कहा जोर-जोर से पुकारों तो आ जाएंगे। गौरा गोपाल-गोपाल कह कर पुकारने लगा, किन्तु भगवान नहीं आए। गौरा का उदास चेहरा देखकर गुरु ने गौरा से पूछा क्या बात है। गौरा ने गुरु को पूरी बात बताई, तो गुरुजी को लगा कोई गौरा से छल कर रहा है। गुरु ने फ़िर से आवाज लगाने को कहा। लेकिन भगवान प्रकट नहीं हुए तो मायूस होकर गौरा ने पुनः आवाज नहीं लगाई। तभी पीछे से एक आवाज आई कि गौरा आज तुमने मुझे आवाज क्यों नहीं लगाया। दोनों में प्रागढ़ मित्रता हो गई। गुरु जी को गौरा की चिंता होने लगी। गुरु के पूछने पर गौरा ने सब बता दिया। गुरु ने सोचा कहीं कोई गौरा के साथ छल तो नहीं कर रहा तो गुरु जी ने गौरा से पूछा तो गौरा गोपाल का रंग रूप सब बता दिया। गुरु ने गौरा से कहा दोबारा जाने पर फिर से आवाज लगाना। गौरा ने गुरु द्वारा दालबाटी आमंत्रण की बात बताई तो गोपाल ने इंकार कर दिया। गौरा के मनाने पर गोपाल राजी हुए। जैसे ही गुरु ने भगवान का विशाल रूप को देखा वे नतमस्तक हो गए। गुरु ने गौरा को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। प्रसन्नता जाहिर की। भगवान ज्ञानी या विद्वान को नहीं बल्कि भक्तों को दर्शन देते हैं।

भगवान हमेशा अपने भक्त को पाना चाहते हैं:-

कथा वाचक पं. श्री राजू जी महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा भागवत की कथा सुनने और भगवान को अपने मन में बसाने से व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है। भगवान हमेशा अपने भक्त को पाना चाहते हैं, जितना भक्त भगवान के बिना अधूरा है, उतना ही अधूरा भगवान भी भक्त के बिना है। भगवान ज्ञानी को नहीं बल्कि भक्त को दर्शन देते हैं और सच्चे मन से ही भगवान को प्राप्त किया जा सकता है।

 

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