सेवानिवृत्त शिक्षक का पेशंन दिलाने 50 हजार का रिश्वत मांगने का मस्तूरी बीईओ पर लगा आरोप…..! कोई जाँच नहीं होगा: डीईओ

बिलासपुर:- (विमल कांत की रिपोर्ट) जिले में किसी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी पर रिश्वत मांगने का सीधा आरोप पहली बार लगा है। इसकी शिक्षक ने लिखित शिकायत कलेक्टर से की है। इसमें आरोप है, कि बीईओ ने पचास हजार रूपए घूस नहीं देने पर पूरी कार्रवाई होने के बाद भी पेंशन रोक दिया है। कलेक्टर ने जांच का आश्वासन दिया है। उक्त मामले में डीईओ ने जांच से सीधे इंकार कर दिया। उनका कहना है कि शिक्षक अभी रिटायर हुआ है। भुगतान मिलने में समय लगता है। आरोप कोई भी किसी पर लगा सकता है।

मस्तूरी ब्लाक में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला परसदा में उच्च वर्ग शिक्षक के पद पर कार्यरत रामकिशुन राठौर विगत 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जनवरी माह में ही आधार कार्ड, पेन कार्ड, फोटो, पहचान पत्र आदि सभी आवश्यक अभिलेख पेंशन के लिये बीईओ ऑफिस मस्तूरी में खण्ड लिपिक के पास जमा किए। लिपिक के द्वारा पेंशन प्रकरण के लिए ऑफलाइन आवेदन बनाकर बीईओ अश्विनी भारद्वाज का हस्ताक्षर लेकर ऑनलाइन कर फिर से बीईओ के पास प्रस्तुत किया गया। आरोप है कि मस्तूरी बीईओ अश्विनी भारद्वाज ने शिक्षक को ऑफिस बुलाकर पचास हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिक्षक ने देने से इंकार किया, तब उन्होंने कहा कि पेंशन के लिए आगे की कार्रवाई नहीं करूंगा। इसके बाद शिक्षक श्री राठौर की पेंशन रोक दी गई है। वहीं उनके साथ रिटायर होने वाले दूसरे शिक्षक का भुगतान किया गया। साथ ही उन शिक्षक को कमिश्नर संजय अलंग के हाथों समस्त देयकों का चेक भुगतान हुआ। जो एक सम्मान की बात है, इसलिए शिक्षक रामकिशुन राठौर ने मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर सौरभ कुमार से की। जिले के किसी भी बीईओ के खिलाफ रिश्वत मांगने की लिखित शिकायत पहली बार की गई। इसको कलेक्टर सौरभ कुमार ने गंभीरता से लेते हुए शिक्षक को आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं दूसरी तरफ डीईओ डी. के. कौशिक का कहना है कि रिश्वत लेने का आरोप कोई भी किसी के ऊपर लगा सकता है। शिक्षक 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुआ है। इतना जल्दी किसी की पेंशन नहीं बनती। इसमें समय लगता है, इसलिए मामले की जांच नहीं होगी।

