एसबीआई में 2.78 करोड़ का गबन; तत्कालीन मैनेजर निकला मास्टरमाइंड..1290 पेज का चालान कोर्ट में पेश!

रायपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) रायपुर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में करीब 2.78 करोड़ रुपये के गबन के मामले में एसीबी और ईओडब्ल्यू ने बड़ा कदम उठाते हुए तत्कालीन बैंक मैनेजर विजय कुमार अहके के खिलाफ शुक्रवार को एसीबी-ईओडब्ल्यू विशेष न्यायाधीश की अदालत में 1290 पृष्ठों का चालान पेश किया है। यह गबन वर्ष 2024-25 के दौरान किया गया था। जांच के अनुसार, रायपुर के बैरनबाजार स्थित स्पेशलाइज्ड करेंसी एडमिनिस्ट्रेशन ब्रांच (एससीएबी) के तत्कालीन मैनेजर ने सुनियोजित तरीके से बैंक की राशि का गबन किया। आरोपी ने बैंक के आंतरिक कंप्यूटर सिस्टम में हेरफेर कर अगस्त 2024 से जून 2025 के बीच सरकारी धन को अपनी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर कराया और बाद में नेट बैंकिंग के माध्यम से उसे अपने निजी खाते में भेजकर रकम हड़प ली। जांच में सामने आया कि आरोपी मैनेजर ने कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से कूटरचित क्यू तैयार कर बैंक के ब्रांच जनरल लेजर खाते से रकम निकालने की प्रक्रिया शुरू की। यह वही खाता होता है जिसमें सरकारी तथा बड़ी वित्तीय प्रविष्टियां दर्ज होती हैं। निगरानी से बचने के लिए उसने हर ट्रांजेक्शन की राशि 5 लाख रुपये से कम रखी, ताकि बैंक के हाई वैल्यू ट्रांसफर अलर्ट सिस्टम में यह लेनदेन संदिग्ध न दिखाई दे। इसके अलावा वह हर 30 दिन के भीतर पुरानी प्रविष्टियों को रोलओवर कर नई प्रविष्टि में बदल देता था, जिससे शाखा के नियंत्रक अधिकारियों को वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाता था। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी ने कुल 75 अलग-अलग लेनदेन के जरिए पूरी राशि अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर की। पत्नी के खाते में मोबाइल नंबर आरोपी के ही मोबाइल से लिंक था, जिसके कारण सभी ओटीपी सीधे मैनेजर को मिलते थे। इसके बाद वह नेट बैंकिंग के माध्यम से रकम अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लेता था। आरोप पत्र के अनुसार आरोपी ने गबन की राशि को क्रिप्टोकरेंसी, कमोडिटी और ऑप्शन ट्रेडिंग में निवेश किया। इसके लिए उसने ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रकम को विभिन्न निवेश माध्यमों में लगाया। मामले की जांच के दौरान अधिकारियों ने बैंक के मुख्य सर्वर से प्राप्त लेनदेन का डेटा, डिजिटल लॉग, बैंक स्टेटमेंट, जब्त दस्तावेज और गवाहों के बयान एकत्र किए। इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर पूरे मामले की जांच एसीबी और ईओडब्ल्यू को सौंपी गई थी।
