विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म: दुर्ग फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को 10 साल सश्रम कारावास की सजा!

दुर्ग: (प्रांशु क्षत्रिय) विवाह का झूठा वादा कर युवती से शारीरिक संबंध बनाने के मामले में दुर्ग की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि झूठे वादे पर मिली सहमति स्वतंत्र सहमति नहीं मानी जा सकती, इसलिए यह बलात्कार की श्रेणी में आता है। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) अवध किशोर की अदालत ने सत्र प्रकरण क्रमांक 62/2024 में आरोपी सेवक राम मिर्झा (31), निवासी सेजा, थाना खरोरा, जिला रायपुर को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने 5,000 रुपये अर्थदंड भी लगाया है।अभियोजन के अनुसार, जून 2022 में फेसबुक के माध्यम से दोनों की पहचान हुई थी। आरोपी ने विवाह का भरोसा देकर 2022 से 2023 के बीच कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में दूसरी युवती से विवाह कर लिया।
सगाई की जानकारी पर बढ़ा विवाद
4 फरवरी 2024 को पीड़िता को आरोपी की दूसरी युवती से सगाई की जानकारी मिली। विरोध करने पर आरोपी ने पहले इंकार किया, बाद में बहाने बनाने लगा। 20 फरवरी 2024 को आरोपी चार लोगों के साथ पीड़िता के घर पहुंचा और संबंध समाप्त करने की बात कही। 29 फरवरी 2024 को पंडरी स्थित एक रेस्टोरेंट में दोनों परिवारों की बैठक हुई, जिसमें आरोपी ने शादी के लिए सहमति जताई। लेकिन 6 मार्च 2024 को उसने दूसरी युवती से विवाह कर लिया।
अदालत ने व्हाट्सएप चैट व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। इस आधार पर अदालत ने धारा 376(2)(एन) के तहत एक ही महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म का अपराध सिद्ध मानते हुए आरोपी को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई।


















