यूजीसी विनियम 2026 पर बवाल; बिलासपुर में राजपूत क्षत्रिय महासभा 1282 का विरोध, नियमों में संशोधन की मांग!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन से जुड़े यूजीसी विनियम 2026 को लेकर बिलासपुर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। राजपूत क्षत्रिय महासभा 1282 से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन नियमों पर आपत्ति जताते हुए भारत सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र भेजकर संशोधन अथवा निरस्तीकरण की मांग की है। महासभा का आरोप है कि 13 जनवरी 2026 से लागू नए विनियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों और प्राध्यापकों के अधिकारों की अनदेखी की गई है। संगठन का कहना है कि यदि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र द्वारा सामान्य वर्ग के छात्र या शिक्षक के खिलाफ शिकायत की जाती है, तो सीधे कार्रवाई का प्रावधान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उनका दावा है कि आरोपित व्यक्ति को प्रारंभिक स्तर पर पर्याप्त अवसर और निष्पक्ष जांच का भरोसा स्पष्ट रूप से सुनिश्चित नहीं दिखता। महासभा ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि शिकायत असत्य या दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता के विरुद्ध दंड का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है और कैंपस में असंतोष का माहौल बन सकता है। बिलासपुर उपसमिति ने मांग की है कि नियमों में संशोधन कर आरोपित को पूरा पक्ष रखने का अवसर दिया जाए तथा झूठी शिकायत साबित होने पर शिकायतकर्ता पर भी कड़ा दंड तय किया जाए। संगठन का कहना है कि वे भेदभाव के खिलाफ हैं, लेकिन कानून सभी वर्गों के लिए समान और न्यायसंगत होना चाहिए।

