स्कूल में तोड़फोड़ करने की बात कहकर प्राचार्या ने बच्चियों की कर दी पिटाई और 10 दिन की दे दी छुट्टी…? पालकों का आरोप तुगलुकी फरमान जारी कर रही प्राचार्या…? अभिभावकों व छात्राओं ने खोला मोर्चा.. किए जिलाधीश से जांच की माँग…?

बिलासपुर:- (शेख असलम की रिपोर्ट) आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल तारबहार में छोटी सी गलती की वजह से सातवीं कक्षा के छात्राओं को प्राचार्या ने 10 दिन के लिए स्कूल से बाहर कर दिया। बच्चों के माता पिता ने प्राचार्या के खिलाफ शिकायत करते हुए इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

पार्षद शेख असलम का भी कहना है कि प्राचार्या द्वारा बच्चों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। बच्चों के साथ मारपीट भी की गई है, यह उचित नहीं है। कक्षा सातवीं के 5 बच्चों को यहां की प्राचार्या ने 10 दिन के लिए स्कूल से बाहर कर दिया है, बच्चों ने बताया कि स्कूल में जो भी तोड़फोड़ की घटना हुई है। उनका किसी का हाथ नहीं हैं, पालक भी अपने बच्चों के बचाव में प्राचार्या के पास पहुंचे थे, लेकिन प्राचार्या मानने को तैयार नहीं है। कलेक्टर सौरभ कुमार ने इस मामले में डीईओ को जांच के आदेश दिए हैं। बच्चों के माता-पिता का कहना है कि बच्चों को इस तरह दंडित किया जाना उचित नहीं है, शिक्षकों ने छात्राओं के साथ मारपीट भी की है, इस मामले की जांच होनी चाहिए।

भाजपा युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष इन बच्चों को लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे थे, मोनू रजक का कहना है, कि यदि प्राचार्या के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तो भाजपा युवा मोर्चा धरना आंदोलन करेगा। स्वामी आत्मानंद शेख गफ्फार अंग्रेजी माध्यम शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला तारबाहर की प्राचार्या उषा चंद्रा के खिलाफ छात्राओं व अभिभावकों ने मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। बताया जा रहा है, कि उषा चंद्रा द्वारा स्कूल की कुछ छात्राओं के साथ मारपीट की गई और उन्हें सजा के तौर पर 10 दिनों के लिए रेस्टीकेट कर दिया गया। प्राचार्या द्वारा आरोप लगाया जा रहा है, कि इन छात्राओं ने कथित तौर पर स्कूल के कमरे में लगे फाइबर के पार्टीशन को तोड़ दिया है। इस मामले में सबके समक्ष छात्राओं को अपमानित करते हुए उन्हें दंडित किया गया, उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें 10 दिनों के लिए रेस्टीकेट कर दिया गया। जब अभिभावकों ने प्रमाण के तौर पर सीसीटीवी फुटेज दिखाने की बात कही तो प्राचार्या मुकर गई और उन्होंने सीसीटीवी फुटेज दिखाने से भी मना कर दिया। छात्राओं और अभिभावकों का आरोप है, कि स्कूल की प्राचार्या उषा चंद्रा तुगलकी फरमान जारी करती है। साथ ही अभिभावकों ने यह भी सवाल उठाया है, कि आखिर स्कूल में ऐसा कमजोर पार्टीशन क्यों और किसके इशारे पर लगाया गया है, जो बच्चों के साधारण आघात से ही टूट रहा हो। स्कूल में स्थाई दीवारें होनी चाहिए, क्योंकि बच्चों के स्वाभाविक रूप से खेलकूद के दौरान उनसे ऐसी गलती हो सकती है। इसे समझने के बजाय प्राचार्या द्वारा तुगलकी फरमान जारी कर छात्राओं का भविष्य खराब कर रही हैं।

