बिलासपुर; नरसी की टूटी बैलगाड़ी बनी आस्था की पहचान: जया किशोरी की मायरा कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब……

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) श्री प्रेम सेवा परिवार के तत्वावधान में मिनोचा कॉलोनी स्थित कथा स्थल पर विश्वविख्यात कथावाचक जया किशोरी द्वारा प्रस्तुत नानी बाई का मायरा कथा एवं भजन कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति के साथ आगे बढ़ रहा है। कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और कृष्ण भक्ति के गीतों पर झूमते नजर आए।

कथा के दौरान जया किशोरी ने नरसी मेहता के जीवन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि कैसे निर्धनता के समय समाज साथ छोड़ देता है, लेकिन भगवान कभी साथ नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि जब नरसी जी मायरा लेकर जाने निकले तो उनके पास न धन था, न साधन। टूटी बैलगाड़ी, कपड़ों की पोटली और तुंबा ही उनका सहारा था, फिर भी उनका विश्वास अडिग रहा। जया किशोरी ने अपने संदेश में स्पष्ट कहा कि भक्ति का अर्थ मेहनत से भागना नहीं है। पढ़ाई, काम और संघर्ष जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “भगवान परीक्षा में पेपर बनाने नहीं आते, कर्म तो स्वयं करना पड़ता है। भक्ति हमें विपरीत परिस्थितियों में डटकर खड़े रहना सिखाती है।”

कथा में यह भी बताया गया कि कई बार लोग कहते हैं कुंडली में राजयोग है, लेकिन परिस्थितियों से मुकाबला किए बिना कोई राजयोग नहीं बनता। संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने परिवार सहित कथा श्रवण किया। आज कथा पंडाल में विशेष क्षण तब देखने को मिला जब 15 मिनट के लिए बिजली बंद कर मोबाइल की रोशनी में श्रद्धालुओं ने भजन का आनंद लिया। जया किशोरी ने विवाह और सामाजिक व्यवहार पर भी संदेश देते हुए कहा कि शादी जैसे अवसरों पर ईर्ष्या और नाराजगी नहीं, बल्कि सहयोग और खुशी होनी चाहिए। कथा का आज 11 जनवरी को अंतिम दिन है, जिसमें नानी बाई के मायरा भरने का विशेष वर्णन होगा। जया किशोरी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि महिलाएं पीले और लाल वस्त्र पहनकर समय से पहले दोपहर 2:30 बजे कथा स्थल पहुंचें। श्री प्रेम सेवा परिवार ने भी शहर एवं आसपास के श्रद्धालुओं से अंतिम दिन की कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने का अनुरोध किया है।


















