सीपत; युवक की संदिग्ध मौत, एसएसपी कार्यालय पहुंचे परिजनों ने जताया हत्या का संदेह…पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जिले के सीपत थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नरगोड़ा निवासी 26 वर्षीय राजेंद्र सूर्यवंशी उर्फ राजू की मौत का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। मृतक राजेंद्र के पिता सनोहरल लाल सूर्यवंशी सहित अन्य परिजनों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय बिलासपुर पहुंचकर इस मामले में कुछ लोगों पर हत्या का संदेह जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पेंटिंग का काम करने वाला राजेंद्र अपनी पत्नी अनुपा सूर्यवंशी के साथ बिलासपुर के शनिचरी छात्रावास रोड स्थित चांटीडीह के अनिला टावर में रह रहा था। राजेंद्र 13 जुलाई को अचानक लापता हो गया था। अगले दिन 14 जुलाई को परिजनों ने सरकंडा थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। तलाश के दौरान 15 जुलाई को उसका शव बिलासपुर के पचरीघाट से बरामद हुआ। उस वक्त ही परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन आरोप है कि पंचनामा रिपोर्ट में सिटी कोतवाली पुलिस ने हत्या की आशंका दर्ज नहीं की और न ही परिजनों के बयान लिए गए। मृतक के पिता सनोहर लाल सूर्यवंशी के अनुसार 6 अगस्त को प्राप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि राजेंद्र के शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर चोटें थीं और उसकी सभी पसलियां टूटी हुई पाई गईं। रिपोर्ट में मौत का कारण इन्हीं गंभीर आंतरिक चोटों को बताया गया है। इसके बावजूद अब तक थाना स्तर पर हत्या का मामला दर्ज नहीं किया गया है। राजेंद्र के पिता सनोहर लाल सूर्यवंशी ने आरोप लगाया है कि यह मौत डूबने या प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हिंसक हत्या है। उनका कहना है संदिग्ध आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जाए, ताकि हत्या की पूरी कड़ी सामने आ सके।
जांच में लापरवाही का आरोप……
सनोहर लाल सूर्यवंशी का कहना है कि घटना के अगले दिन जब उन्होंने मृतक के मोबाइल पर कॉल किया, तो राजेंद्र का सिम कार्ड कुश कुमार के मोबाइल में लगा हुआ पाया गया, जो मामले को और अधिक संदिग्ध बनाता है। इसके बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
निष्पक्ष जांच के लिए विशेष टीम गठित करने की मांग……
परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की है। साथ ही गवाहों के बयान के आधार पर तत्काल अपराध दर्ज करने, घटनास्थल से जुड़े मोबाइल कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल व अन्य जांच रिपोर्ट को सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की भी मांग की गई है। अब देखना होगा कि गंभीर आरोपों और पीएम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद पुलिस प्रशासन इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है।
