बिलासपुर; धान खरीदी की तैयारी तेज, हड़ताल के बीच प्रशासन ने नए कर्मचारियों को दिया प्रशिक्षण, 17 नवंबर से शुरू होगी खरीदी….

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहने के बीच जिला प्रशासन ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों को रफ्तार दे दी है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर शुक्रवार को नए कर्मचारियों को धान खरीदी से संबंधित समूची प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। जिले के 140 उपार्जन केंद्रों में खरीदी व्यवस्था सुचारू रखने के लिए राजस्व, कृषि, खाद्य और सहकारिता विभाग के चुनिंदा कर्मचारियों को समिति प्रबंधक और खरीदी प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर ने प्रशिक्षण सत्र में स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, सरल और समयबद्ध हो। इसके लिए उपार्जन केंद्रों की साफ-सफाई, बारदाना उपलब्धता, टोकन वितरण, वजन और गुणवत्ता परीक्षण जैसी सभी व्यवस्थाएं समय से दुरुस्त कर ली जाएं। खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ने बताया कि शासन द्वारा धान खरीदी की आधिकारिक तिथि 15 नवंबर तय की गई थी, लेकिन शनिवार और रविवार अवकाश होने के कारण अब खरीदी प्रक्रिया 17 नवंबर से शुरू होगी। हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था बनाते हुए अन्य विभागों के कर्मचारियों को केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि किसानों को परेशानी न हो। प्रशिक्षण सत्र में उपार्जन केंद्रों की तैयारी से लेकर वित्तीय आहरण, बारदाना प्रबंधन, टोकन वितरण और गुणवत्ता परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। जिन समितियों के एक से अधिक उपार्जन केंद्र हैं, वहां वित्तीय अधिकार समिति मुख्यालय में पदस्थ खरीदी प्रभारी के पास रहेंगे। इस बीच, छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की हड़ताल 12वें दिन भी जारी रही। महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश की 2058 समितियों और 2739 उपार्जन केंद्रों में लगभग 15 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन नियमित वेतन और सुविधाओं से वंचित हैं। उनकी प्रमुख मांगों में वर्ष 2023-24 और 2024-25 में हुई सुखत राशि का भुगतान, परिवहन के बाद संपूर्ण सुखत राशि समितियों को देना, आउटसोर्सिंग बंद कर कंप्यूटर ऑपरेटरों का नियमितीकरण और मध्यप्रदेश की तर्ज पर वार्षिक 3 लाख रुपए प्रबंधकीय अनुदान शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक और अपर मुख्य सचिव के पत्र के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
