मस्तूरी के पं. श्रीप्रकाश तिवारी “श्रीरंग” को स्वर्ण पदक से किया गया सम्मानित…डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल की उपस्थिति में मिला सम्मान!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) मस्तूरी के पं. श्रीप्रकाश तिवारी “श्रीरंग” ने एक बार फिर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय, करगी रोड कोटा में आयोजित द्वितीय दीक्षांत समारोह में उन्हें संस्कृत साहित्य विषय में स्नातकोत्तर (एम.ए.) में प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रामेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदान किया गया। गौरतलब है कि पं. श्रीप्रकाश तिवारी इससे पूर्व वर्ष 2016 में एशिया के प्रथम संगीत विश्वविद्यालय, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में आयोजित चतुर्दश दीक्षांत समारोह में ऑल इंडिया प्रावीण्य सूची में तृतीय स्थान प्राप्त करने पर स्व. डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति स्वर्ण पदक से सम्मानित हो चुके हैं। मस्तूरी पुरानी बस्ती निवासी पं. श्रीप्रकाश तिवारी, सेवा निवृत्त प्रधानपाठक पं. भवानी प्रसाद तिवारी और श्रीमती सुषमा तिवारी के सुपुत्र हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं धर्मपत्नी श्रीमती सूर्यबाला तिवारी को दिया है। द्वितीय स्वर्ण पदक की इस उपलब्धि से परिवार, शुभचिंतकों और नगरवासियों में खुशी का माहौल है।
“यह सम्मान मेरे अपनों का है”…पं. श्रीप्रकाश तिवारी “श्रीरंग”
अपनी इस उपलब्धि पर पं. श्रीप्रकाश तिवारी ने कहा कि यह सम्मान उनके माता-पिता की मेहनत, त्याग और संस्कारों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि उनके दादा स्व. वृन्दा प्रसाद तिवारी “मुनुवा महाराज” संगीत के उच्च कोटि के विद्वान थे, जबकि उनके पिता पं. भवानी प्रसाद तिवारी और बुआ सुश्री अनसुईया तिवारी देश के ख्यातिलब्ध श्रीरामचरितमानस प्रवाचक हैं। घर के इस धार्मिक और संगीतमय वातावरण से प्रेरित होकर उन्होंने संगीत और संस्कृत दोनों विषयों में उत्कृष्टता प्राप्त की। वर्ष 2016 में खैरागढ़ विश्वविद्यालय से स्नातक करते हुए उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में आल इंडिया स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त किया था, जिसके लिए उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों स्वर्ण पदक मिला था। अब द्वितीय स्वर्ण पदक प्राप्त कर उन्होंने मस्तूरी और बिलासपुर जिले का नाम एक बार फिर गौरवान्वित किया है।

“बाल्यकाल से ही अद्भुत प्रतिभा के धनी हैं श्रीरंग”…पं. राजेश पाण्डेय
मल्हार के वरिष्ठ साहित्यकार व समाजसेवी पं. राजेश पाण्डेय ने बताया कि पं. श्रीप्रकाश तिवारी “श्रीरंग” बाल्यकाल से ही अद्भुत प्रतिभा के धनी हैं। मात्र तीन वर्ष की आयु से वे हारमोनियम वादन और गायन में पारंगत हो गए थे। उन्होंने राष्ट्रीय मंचों पर संस्कृत के आचार्यों व विद्वानों के समक्ष वेदों की ऋचाओं का पाठ कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। संस्कृत भाषा और संगीत दोनों में निपुण श्रीरंग ने वैदिक मंत्रों के स्वरबद्ध गायन की विशिष्ट परंपरा को जीवित रखा है। वर्ष 2018 में उज्जैन में आयोजित राज्य स्तरीय महाकवि कालिदास समारोह में उनके निर्देशन में मंचित “अभिज्ञानशकुंतलम” नाटक को विशेष सराहना मिली थी, जिसके लिए उन्हें मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सम्मानित किया गया। वर्तमान में पं. श्रीप्रकाश तिवारी श्रीरामकथा और श्रीमद्भागवत महापुराण की संगीतमय प्रस्तुतियों के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और सनातन परंपरा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उनके कोमल स्वभाव और मधुर वाणी ने जनमानस के बीच उन्हें गहरी श्रद्धा और सम्मान दिलाया है। पं. श्रीप्रकाश तिवारी “श्रीरंग” का यह द्वितीय स्वर्ण पदक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि मस्तूरी और पूरे बिलासपुर जिले के लिए गौरव का विषय बन गया है।
