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विवादों के बावजूद पोस्टिंग; सीपत टीआई गोपाल सतपथी पर उठे सवाल..? पीएम-सीएम पोस्टर विवाद से लेकर अवैध वसूली तक..फिर भी मिला रेंज साइबर थाना का जिम्मा!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) सीपत थाना एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पोस्टर शौचालय के गेट पर लगाने के बाद मचे बवाल के बावजूद थाना प्रभारी गोपाल सतपथी को न सिर्फ बचा लिया गया, बल्कि उन्हें ससम्मान रेंज साइबर थाना भेज दिया गया। इस कदम ने पुलिस विभाग से लेकर आम जनता तक में सवाल खड़े कर दिए हैं..आखिर किस नेता या अधिकारी के संरक्षण में ऐसे अधिकारी बच निकलते हैं? बताया जा रहा है कि बीते 15 दिनों के भीतर ही सीपत थाना प्रभारी के कई कारनामे सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें कार्रवाई से बचाकर लगातार संरक्षण दिया जा रहा है। इससे पहले थाना स्टाफ पर 185 की कार्यवाही की धमकी देकर अवैध वसूली और प्रताड़ना का मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचा था। पीड़ितों ने एसपी को लिखित शिकायत सौंपकर थाना प्रभारी पर संरक्षण देने का आरोप लगाया था, लेकिन कार्रवाई की गाज केवल एएसआई सहेत्तर कुर्रे पर गिरी थी, जबकि टीआई गोपाल सतपथी को बचा लिया गया था। अब 15 दिन बाद फिर सीपत थाना विवादों में है। थाना परिसर के सार्वजनिक शौचालय में सुशासन पखवाड़ा के तहत छत्तीसगढ़ शासन के मोनो के साथ लगाए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पोस्टर को गेट पर लगाने की घटना ने भाजपा कार्यकर्ताओं को भड़का दिया। थाने के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ, लेकिन कार्यवाही के बजाय टीआई सतपथी का “प्रमोशन” कर उन्हें रेंज साइबर थाना भेज दिया गया। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का अपमान करने वाले अधिकारी को सजा देने की बजाय सम्मान देना इस पूरे तंत्र पर सवाल खड़ा करता है। इतना ही नहीं, टीआई सतपथी पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं..चाहे क्षेत्र में अवैध शराब कारोबारियों को संरक्षण देना हो या चोरी की घटनाओं पर चुप्पी साधना। बताया गया कि थाना से मात्र 100 मीटर की दूरी पर लगातार तीन बार चोरी होने के बाद भी उन्होंने एफआईआर दर्ज नहीं की। पत्रकारों द्वारा मामला एसपी रजनेश सिंह तक पहुंचाने के बाद ही एफआईआर दर्ज हुई। अब सवाल यह है कि..क्या कानून के रखवाले खुद कानून से ऊपर हो गए हैं? विवादों और गंभीर आरोपों के बावजूद ऐसे अधिकारी को लगातार संरक्षण क्यों मिल रहा है..यह अब बिलासपुर पुलिस प्रशासन की साख पर बड़ा सवाल बन गया है।

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