रायपुर सेंट्रल जेल में गढ़े जा रहे ‘इको-फ्रेंडली गणेश’, कैदियों ने दिखाई कला और आत्मनिर्भरता की राह……

रायपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) राजधानी रायपुर में गणेशोत्सव की रौनक नजर आने लगी है। हर जगह गणपति बप्पा की मूर्तियां सज रही हैं। लेकिन इस बार एक पहल खास है— रायपुर सेंट्रल जेल के कैदी खुद गणेश प्रतिमाएं बना रहे हैं। यह न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि आत्मनिर्भरता और समाज में सकारात्मक संदेश का उदाहरण भी है। गणेशोत्सव पर शहर भर में प्रतिमाओं की बिक्री आम है। लेकिन रायपुर सेंट्रल जेल के कैदियों ने इसे खास बना दिया है। कैदियों ने मिट्टी, तुलसी और गोबर से पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। इन मूर्तियों को आज से जेल एम्पोरियम में बिक्री के लिए रखा गया है। खास बात यह है कि इन्हें आजीवन कारावास की सजा काट रहे छह कैदियों— भोजराम, सुजीत, खेलन, भेषन, दीपक और हेमंत ने अपने हुनर और मेहनत से तैयार किया है।जेल प्रशासन का कहना है कि इस तरह की रचनात्मक पहल न केवल कैदियों को हुनरमंद बना रही है बल्कि उनके पुनर्वास और आत्मनिर्भरता का रास्ता भी खोल रही है। लोग भी इन प्रतिमाओं को खरीदकर गणेशोत्सव की तैयारियों के साथ-साथ कैदियों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं।
