बिलासपुर में कोरोना का फिर कहर; एक सप्ताह में 10 मरीज मिले, प्रशासन बेखबर..हाईकोर्ट के जस्टिस कोरोना पॉजिटिव, मॉकड्रिल बना दिखावा..आठ साल की बच्ची से लेकर 86 साल के बुजुर्ग तक संक्रमित, CMHO ने नोडल अफसर की लापरवाही पर जताई नाराजगी!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) शहर में कोरोना संक्रमण एक बार फिर पांव पसारने लगा है, लेकिन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बीते एक सप्ताह में बिलासपुर में कुल 10 कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक बेखबर बने रहे। शुक्रवार को एक ही दिन में चार नए संक्रमित मरीज सामने आए, जिनमें 8 साल की बच्ची, 16 वर्षीय किशोरी और 86 साल के बुजुर्ग भी शामिल हैं। हैरानी की बात यह रही कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को इस पूरे घटनाक्रम की भनक तक नहीं लगी। 4 जून को हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। वे समर वेकेशन के दौरान टूर से लौटे थे। इसके बाद 5 जून को स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने मॉकड्रिल का दिखावा किया, जिसमें जिले में एक भी मरीज नहीं मिलने का दावा किया गया। बाद में यह दावा झूठा साबित हुआ, जब रायपुर से संक्रमण की पुष्टि हुई। गुलाब नगर मोपका निवासी एक ही परिवार के तीन सदस्य..48 वर्षीय पुरुष, 16 वर्षीय बेटा और 8 वर्षीय बेटी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। यह परिवार हाल ही में पुरी यात्रा से लौटा था। घर वापसी के बाद लक्षण दिखने पर टेस्ट कराया गया, जो पॉजिटिव आया।
ट्रैवल हिस्ट्री के बावजूद कोई निगरानी नहीं…….
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि संक्रमितों में से अधिकतर की ट्रैवल हिस्ट्री होने के बावजूद न तो समय पर होम आइसोलेशन की सलाह दी गई, न ही संपर्क ट्रेसिंग की गई। मरीज अपने स्तर पर इलाज करवा रहे हैं।
CMHO ने जताई नाराजगी, नोडल अधिकारी पर सवाल…..
स्वास्थ्य विभाग के कोविड नोडल अधिकारी डॉ. प्रभात श्रीवास्तव ने शहर में मिल रहे संक्रमित मरीजों की जानकारी CMHO कार्यालय को नहीं दी, बल्कि केवल राज्य नोडल अधिकारी को सूचित किया।
इस पर CMHO डॉ. सुरेश तिवारी ने नाराजगी जाहिर की और निर्देश दिए कि हर संक्रमित की जानकारी तुरंत विभाग और कार्यालय में साझा की जाए।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से उठे सवाल……
बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही और आंकड़ों को छुपाने का रवैया जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। अब जरूरी है कि स्वास्थ्य विभाग सतर्कता बरते, टेस्टिंग बढ़ाए और पारदर्शिता से काम करे, ताकि संक्रमण पर काबू पाया जा सके।
