रायपुर; अंडे के ठेले से लेकर अपराध के अड्डे तक!..तोमर बंधुओं की आलीशान जिंदगी पर पुलिस की छापेमारी, करोड़ों की संपत्ति जब्त..खबर पढ़कर जानिए पूरी कहानी!

रायपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) एक समय सड़क किनारे ठेला लगाकर आजीविका चलाने वाले वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर अब अपराध की दुनिया में बड़े नाम बन चुके हैं। मंगलवार रात क्राइम ब्रांच ने करणी सेना के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र तोमर और उनके भाई, कुख्यात हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर के रायपुर स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर सनसनी फैला दी। करीब 25 सदस्यीय टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अब तक की जांच में पुलिस ने करीब 37 लाख रुपये नकद, 70 तोला सोना, चांदी के आभूषण, तीन लग्जरी कारें (जिसमें एक बीएमडब्ल्यू शामिल है), दो पिस्तौल, 20 जिंदा कारतूस और कई जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा भाठागांव में स्थित 5,000 वर्गफीट की आलीशान कोठी भी पुलिस के रडार पर है, जिसकी भव्यता ने जांच अधिकारियों को चौंका दिया है। क्राइम ब्रांच की छापेमारी की भनक लगते ही वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी तोमर और रोहित सिंह तोमर फरार हो गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक रोहित का मोबाइल स्विच ऑफ है और उसका निजी बाउंसर भी लापता है। फिलहाल दोनों की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। दोनों भाइयों के खिलाफ रायपुर के विभिन्न थानों में सूदखोरी, रंगदारी, अपहरण, गोलीकांड, मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसे 12 से अधिक गंभीर अपराध दर्ज हैं।
छोटे अपराध से शुरू हुआ था सफर……
तोमर बंधु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और रायपुर में पिछले एक दशक से सक्रिय हैं। उनका आपराधिक सफर रेलवे स्टेशन पर पॉकेटमारी जैसे छोटे अपराधों से शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग, अवैध हथियार कारोबार और रंगदारी वसूली तक जा पहुंचा। अपराध की कमाई से उन्होंने भव्य कोठी, लग्जरी गाड़ियाँ और महंगी जीवनशैली को अपनाया, जबकि कानून की नजरों से लंबे समय तक बचते रहे।
महिलाएं भी शामिल, परिवार पर भी केस दर्ज……
सिर्फ तोमर बंधु ही नहीं, बल्कि परिवार की महिलाओं पर भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2006 से लेकर 2019 तक उनके खिलाफ रायपुर के आजाद चौक, गुढियारी, कोतवाली, अमलीडीह, भाठागांव, कबीर नगर, हलवाई लाइन सहित कई थाना क्षेत्रों में हत्या, मारपीट, उगाही, धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और महिलाओं से मारपीट जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं।
सिस्टम पर भी उठे सवाल…….
यह मामला केवल आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक रसूख के मेल से पनपी उस व्यवस्था की कहानी कहता है, जिसमें अपराधी कानून से ऊपर खुद को समझने लगते हैं। हाइपर क्लब गोलीकांड में रोहित तोमर की गिरफ्तारी और फिर सार्वजनिक रूप से उसका जुलूस निकालना भी इस गिरोह की गंभीरता को दिखाता है। इसके बावजूद वे जमानत पर छूटने के बाद भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे।
एक बड़े नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद……
क्राइम ब्रांच की यह छापेमारी महज शुरुआत मानी जा रही है। पुलिस को संदेह है कि इस कार्रवाई से एक संगठित अपराध और आर्थिक गड़बड़ियों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। तोमर बंधुओं का यह मामला केवल कानून व्यवस्था के सवाल नहीं खड़े करता, बल्कि यह दर्शाता है कि यदि समय रहते प्रशासन सतर्क न हो, तो छोटे अपराधी भी बड़े अपराध सिंडिकेट में तब्दील हो सकते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक दिन की कार्रवाई बनकर रह जाती है, या सिस्टम अब सच में इन पर नकेल कसने को तैयार है।


















