बिलासपुर; सिरगिट्टी पुलिस की ‘सेटिंग’ चरम पर; महिला अपराधों पर संवेदनहीनता की हद पार, उच्च अधिकारियों की फटकार के बाद जागे थाना प्रभारी..शांति समिति की बैठक का ढोंग..पीठ पीछे जुआ, सट्टा और कबाड़ का खेल, एक ही दिन में खुले थाने की लापरवाही के दो बड़े मामले!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) एक तरफ सिरगिट्टी थाने में थाना प्रभारी अभय सिंह बैस के नेतृत्व में शांति समिति की बैठक आयोजित कर कानून-व्यवस्था का ढोंग रचा जा रहा है, तो दूसरी तरफ उनके कार्यक्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में जुआ, सट्टा और कबाड़ का अवैध धंधा चरम पर है, जिसे कथित तौर पर स्थानीय पुलिस की मूक सहमति हासिल है। पुलिस की इस सुस्ती का खामियाजा अब महिलाओं और नाबालिग बच्चियों को भुगतना पड़ रहा है। रविवार को सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में महिला संबंधी अपराधों में लापरवाही के दो ऐसे मामले सामने आए, जिसने खाकी को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। दोनों ही मामलों में जब उच्च अधिकारियों ने कड़ी फटकार लगाई, तब जाकर पुलिस ने अपराध दर्ज किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार पहले मामले में रायपुर के रायपुरा महादेव घाट की रहने वाली एक ब्यूटीशियन युवती का तिफरा निवासी दिलेश्वर साहू से इंस्टाग्राम के जरिए प्यार हुआ। जब दिलेश्वर ने फोन उठाना बंद किया, तो पीड़िता 7 जून को सुबह उसके घर पहुंची। वहां दिलेश्वर तो नहीं मिला, लेकिन उसके बड़े भाई दिलीप ने युवती के साथ गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसके सीने, कंधे और हथेली पर चोटें आईं। सूत्रों के मुताबिक जब पीड़ित युवती चोटिल हालत में रिपोर्ट दर्ज कराने सिरगिट्टी थाने पहुंची, तो वहां मौजूद स्टाफ ने उसके साथ बेहद बदतमीजी और दुर्व्यवहार किया। पुलिस के इस बर्ताव और सदमे से पीड़िता थाने में ही चक्कर खाकर गिर पड़ी। आनन-फानन में महिला पुलिसकर्मियों ने उसे पेट्रोलिंग वाहन में डालकर अस्पताल पहुंचाया। हद तो तब हो गई जब 2-3 घंटे के इलाज के बाद पीड़िता दोबारा थाने पहुंची, तो फिर उसके साथ वही संवेदनहीन रवैया अपनाया गया। आखिरकार जब यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, तब ऊपर से पड़ी कड़ी फटकार के बाद पुलिस ने आनन-फानन में मामला दर्ज किया। वहीं दूसरा मामला और भी ज्यादा झकझोर देने वाला है, जहां एक कलयुगी शिक्षक ने गुरु-शिष्य के रिश्ते को कलंकित कर दिया। वृंदावन परिसर सिरगिट्टी निवासी एक सैलून संचालक ने अपनी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ हुए अनाचार की शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता पहले सेंट जेवियर स्कूल में पढ़ती थी। 14 दिसंबर 2025 को राहुल बंगारू नाम का शिक्षक उसे पुस्तक दिलाने के बहाने शिवम होटल ले गया और कमरे में बंधक बनाकर कई बार बलात्कार किया। आरोपी ने किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। पीड़िता ने हिम्मत कर इस घटना की जानकारी सेंट जेवियर स्कूल की प्रिंसिपल संतोषी डाकुआ, जॉन सर और गिरधर सर को दी, लेकिन संवेदनहीन स्कूल प्रबंधन ने मामले को दबाते हुए नजरअंदाज कर दिया। 7 जून को जब पीड़िता ने दोबारा आरोपी शिक्षक को देखा तो उसने अपनी बड़ी बहन को आपबीती बताई। दुखी पिता रविवार सुबह ही सिरगिट्टी थाने पहुंच गया था, लेकिन थाना प्रभारी की लापरवाही का आलम देखिए पिड़ित पिता सुबह से शाम तक थाने में बैठा रहा, लेकिन पुलिस तोरवा थाने का मामला कहकर टालमटोल करती रही। शाम को जब वरिष्ठ अधिकारियों को इस घोर लापरवाही का पता चला, तो उन्होंने थाना प्रभारी को सख्त हिदायत दी, जिसके बाद देर शाम पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
अपराधियों में खत्म हुआ पुलिस का डर, सरेराह फल व्यवसायी की हत्या…..
सिरगिट्टी पुलिस की इसी अकर्मण्यता का नतीजा रविवार की शाम को देखने को मिला। पुलिस का खौफ खत्म होने के कारण पुरानी रंजिश को लेकर एक युवक ने फल दुकान संचालक मनीष गोस्वामी पर जानलेवा हमला कर दिया। इलाज के दौरान मनीष की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी दुर्गेश साहू को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल वही है कि अगर पुलिस का खौफ होता, तो क्या आरोपी सरेराह इस वारदात को अंजाम देने की हिम्मत करता। जब महिला और नाबालिग बच्चियों से जुड़े अत्यंत संवेदनशील अपराधों पर सिरगिट्टी पुलिस का यह रवैया है, तो सामान्य जनता और छोटी-मोटी घटनाओं पर इनकी क्या प्रतिक्रिया होगी? शांति समिति की बैठक करने वाले थाना प्रभारी अभय सिंह बैस क्या केवल कागजी कार्रवाई और ‘सेटिंग’ के भरोसे ही क्षेत्र की कानून व्यवस्था चलाएंगे?
