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बिलासपुर जिले का एक ऐसा गांव जो बना बदलाव की मिसाल: नशे पर महिलाओं ने लगा दी पूरी तरह लगाम, न शराब, न झगड़ा..थाना प्रभारी करेंगे महिला कमांडो को सम्मानित, रफ्तार की खबर पढ़कर जानिए पूरी कहानी………

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) जहां पूरे देश में होली जैसे बड़े त्योहार पर शराब की खपत आम बात मानी जाती है, वहीं सीपत की एक छोटी सी बस्ती जुहली ने वो कर दिखाया है जो कई बड़े शहर भी नहीं कर पाए। इस गांव ने होली पर शराब की एक बूंद तक न बिकने दी और ये कमाल किसी बाहरी ताकत ने नहीं, बल्कि गांव की जागरूक महिलाओं ने किया है, जो अब ‘महिला कमांडो’ के नाम से जानी जा रही हैं। गांव की 300 से ज्यादा महिलाओं ने तीन साल पहले शराब के खिलाफ बिगुल फूंका और अब जुहली शराबमुक्त है। इन महिलाओं ने सिर्फ विरोध नहीं किया, बल्कि घर-घर जाकर लोगों को समझाया कि शराब किस तरह परिवार, बच्चों और समाज को बर्बाद करती है। शराबबंदी के इस आंदोलन में सीपत थाना प्रभारी टीआई गोपाल सतपथी ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने चौपाल लगाकर महिलाओं को एकजुट किया और उनके जज्बे को सलाम करते हुए ‘महिला कमांडो’ नाम दिया।

अब न झगड़े, न डर– गांव में है सुकून……

गांव की सरपंच चन्देश्वरी त्रिभुवन पोर्ते खुद एक आदिवासी महिला हैं। वो कहती हैं कि पहले हमारे गांव में झगड़े, गाली-गलौज और तनाव रोजमर्रा की बात थी। लेकिन जबसे महिलाओं ने मोर्चा संभाला है, गांव में अमन और चैन लौट आया है।

कोरोना बना था चेतना का कारण….

शराबबंदी समूह की अध्यक्ष वेदमती मरावी बताती हैं कि कोरोना काल में जब लोग घरों में बंद थे, तब उन्होंने देखा कि बच्चे भी शराब पीने लगे हैं। यहीं से आंदोलन की नींव रखी गई। 25 महिला समूहों ने मिलकर एक अभियान चलाया और आज न सिर्फ शराब की बिक्री बंद है, बल्कि गांव में बारात में शराब लाना भी सख्त मना है।

महिलाएं खुद करती हैं निगरानी…..

अब हालात ये हैं कि गांव की महिलाएं नियमित रूप से गश्त करती हैं, ताकि कोई अवैध गतिविधि न हो सके। इस निगरानी का असर साफ दिखता है, गांव में अब शांति है, अपराध न के बराबर हैं और युवा भी इस बदलाव को अपना रहे हैं।

‘महिला कमांडो’ को मिलेगा पहचान पत्र……..

टीआई गोपाल सतपथी कहते हैं, जुहली की महिलाएं बुराइयों से लड़ने में किसी पुलिस से कम नहीं। इसलिए इन्हें महिला कमांडो कहा है। हम इन्हें पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया में हैं ताकि इनकी ताकत और बढ़े। समाज में बदलाव लाने की असली ताकत इन्हीं में है, और मैं इन्हें हरसंभव संबल दूंगा। जुहली गांव ने साबित किया है कि जब महिलाएं जागरूक हों, तो नशा, अपराध और अशांति जैसी किसी भी बुराई को खत्म किया जा सकता है। जुहली आज एक गांव नहीं, बल्कि बदलाव की प्रेरणा है।

 

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