सीपत; 2, 3 महीने में ही दरक गई विकास की तस्वीर! गांव में सड़क टूटी, तालाब बना छलावा, एनटीपीसी की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में…सीएसआर फंड का खेल! रफ्तार की खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला……..


सीपत: (प्रांशु क्षत्रिय) सीपत क्षेत्र को लेकर यह उम्मीद की जाती है कि यहां प्रभावित गांवों में बेहतर विकास कार्य होंगे और लोग खुशहाल जीवन व्यतीत करेंगे। एनटीपीसी की उपस्थिति के कारण यहां बुनियादी सुविधाओं में सुधार की संभावनाएं अधिक हैं और कंपनी ने कई कार्यों की शुरुआत भी की है। लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। जहां एक ओर एनटीपीसी अपने सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत गांवों के विकास का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इसकी निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई नजर आ रही है। इसका सीधा फायदा ठेकेदारों को मिल रहा है जो मनमानी करके घटिया निर्माण कार्य करवा रहे हैं और एनटीपीसी से मोटी रकम वसूल कर रहे हैं।

ग्राम पंचायत जांजी में दिखा ‘थूक पालिस’ विकास का नमूना, सिर्फ चार महीने में दरक गई सड़क, खुल गई गुणवत्ता की पोल……….
ग्राम पंचायत जांजी एनटीपीसी से प्रभावित उन गांवों में से एक है जहां हाल ही में सीएसआर फंड के तहत सड़क और तालाब सौंदर्यीकरण का कार्य कराया गया। ठाकुरदेव से ठाकुरपारा आंगनबाड़ी तक करीब 550 मीटर लंबी सीसी रोड श्री ओम कंस्ट्रक्शन के द्वारा बनवाई गई। लेकिन यह सड़क महज 2 से 3 महीने में ही जवाब दे गई। सड़क के बीचोबीच दरारें उभर आईं और मटेरियल झांकने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क सिर्फ दिखावे के लिए बनाई गई थी। निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ।
तालाब सौंदर्यीकरण बना दिखावे की मिसाल, ट्रिगार्ड टूटे, पिचिंग अधूरी, गांव वाले बोले—हमें मिला छलावा……..
सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि गांव के परसही तालाब में हुए सौंदर्यीकरण कार्य की भी हालत बेहद खराब है। तालाब किनारे लगाए गए ट्रिगार्ड फटना शुरू हो चुके हैं, अंदर की सामग्री बाहर झांक रही है। पचरी घाट से दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं। वहीं पिचिंग कार्य में न लेवलिंग सही है और न ही मजबूती। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि तालाब पूरी तरह से विकसित होगा लेकिन जो भी कार्य हुआ, वह टिकाऊ नहीं निकला।
शिकायत के बाद लीपापोती शुरू, दरारों पर किया गया मसाले से लेप, निरीक्षण के पहले ही ठेकेदार ने छुपाई सच्चाई………
जब लोगों ने घटिया निर्माण कार्य को लेकर शिकायत की, तो एनटीपीसी के अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निरीक्षण से पहले ही ठेकेदार ने दरारों वाली सड़क पर सीमेंट-रेती का लेप कर दिया ताकि अधिकारी भ्रमित हो जाएं। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी के कुछ अधिकारियों की इसमें मिलीभगत भी हो सकती है, तभी तो ऐसे ठेकेदारों को बार-बार काम मिलता है।
अब बड़ा सवाल—क्या ये विकास है या दिखावा…?
एनटीपीसी की योजनाएं अच्छी हैं, इरादे भी मजबूत कहे जाते हैं, लेकिन अगर निगरानी और पारदर्शिता नहीं होगी तो ऐसे कार्य सिर्फ कागजों पर ही दिखेंगे। ग्राम जांजी की घटना ने यह दिखा दिया कि बिना ईमानदारी और जवाबदेही के कोई भी विकास कार्य सिर्फ समय और धन की बर्बादी है। अब देखना यह होगा कि एनटीपीसी इस पर क्या कार्रवाई करती है, क्या दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या यह मामला भी जांच जारी है की फाइलों में दब जाएगा?


