अफसरों की गड़बड़ी से मंत्री हुए शर्मसार! सदन में गलत जवाब देने पर भड़के केदार कश्यप, DFO समेत 5 सस्पेंड, 2 अफसरों पर कड़ी कार्रवाई..खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला…….

छत्तीसगढ़: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई। वन विभाग के अफसरों ने वन मंत्री केदार कश्यप को गलत जानकारी दी, जिससे मंत्री का जवाब सदन में गलत साबित हो गया। इससे गुस्साए मंत्री ने तत्काल जांच के आदेश दिए। अब DFO समेत 5 अधिकारी-कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि 2 अन्य अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बजट सत्र के दौरान पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश ने माना स्थित इंदिरा निकुंज रोपणी में महिला स्व.सहायता समूह के कार्य पर सवाल उठाया। वन विभाग के अफसरों ने मंत्री को बताया कि वहां कोई स्व सहायता समूह संचालित ही नहीं हो रहा। विधायक ने दस्तावेज लहराते हुए कहा कि यह गलत जानकारी है, विभाग के अधिकारी हर साल 50 लाख से 1 करोड़ का घोटाला कर रहे हैं। मंत्री कश्यप ने जांच बैठाई, जिसमें अफसरों की गड़बड़ी पकड़ी गई। जांच में दोषी पाए जाने के बाद तुरंत 5 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया: सतीश मिश्रा– रायपुर परिक्षेत्र अधिकारी, तेजा सिंह साहू– माना नर्सरी प्रभारी वनपाल, अविनाश वाल्दे– वनमंडल कार्यालय सहायक ग्रेड-02, प्रदीप तिवारी– वनमंडल कार्यालय सहायक, अजीत ड़डसेना– परिक्षेत्र कार्यालय लिपिक। इसके अलावा वनमंडलाधिकारी लोकनाथ पटेल और उप वनमंडलाधिकारी विश्वनाथ मुखर्जी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही. श्रीनिवास राव के नेतृत्व में उच्च स्तरीय जांच हुई, जिसमें स्पष्ट हुआ कि वन विभाग ने जानबूझकर जानकारी छुपाई। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि अफसरों की मनमानी बर्दाश्त नहीं होगी और गलत जानकारी देने वालों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

