ग्राम पंचायत सचिवों की हड़ताल पर प्रशासन सख्त, 24 घंटे में ड्यूटी जॉइन करने का अल्टीमेटम…प्रशासन ने जारी किए सख्त निर्देश, अगर सचिव नहीं लौटे तो क्या होगी कार्रवाई? खबर पढ़कर जानिए पूरा मामला…….


रायपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से ग्रामीण विकास योजनाओं पर गहरा असर पड़ा है। पंचायत स्तर पर सभी कार्य ठप हो जाने से गरीब और जरूरतमंद लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और खाद्यान्न वितरण जैसी योजनाओं के प्रभावित होने से ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राज्य पंचायत संचालनालय ने सचिवों को 24 घंटे के भीतर ड्यूटी पर लौटने का सख्त निर्देश दिया है। आदेश की अवहेलना करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, जिसमें निलंबन या सेवा समाप्ति तक के कदम उठाए जा सकते हैं। राज्य के पंचायत संचालनालय ने सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देशित किया है कि वे हड़ताली सचिवों को तुरंत काम पर लौटने के लिए कहें। यदि सचिव तय समय सीमा में अपनी ड्यूटी पर नहीं लौटते हैं तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हड़ताल के कारण विकास कार्यों और जनसेवा योजनाओं में आई रुकावट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि सचिवों की मांगों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन हड़ताल के जरिए कार्य बाधित करना सही नहीं है।
क्या है सचिवों की मांग..?
ग्राम पंचायत सचिव अपनी वेतन वृद्धि, सेवा स्थायित्व और अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है, इसलिए उन्हें हड़ताल करने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि हड़ताल से गरीब तबके को नुकसान हो रहा है, इसलिए यह उचित कदम नहीं है. यदि सचिव 24 घंटे में काम पर वापस नहीं आते तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। जिसमें हड़ताली सचिवों को निलंबित किया जा सकता है या उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। सचिवों की जगह अस्थायी नियुक्तियां की जा सकती हैं या अन्य सरकारी कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन जारी रहे। जो सचिव तय समय पर ड्यूटी पर नहीं लौटेंगे, उनके वेतन भुगतान पर रोक लगाई जा सकती है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलों के कलेक्टरों और पंचायत उप संचालकों को निर्देश दिया गया है कि सचिवों को तत्काल काम पर वापस लाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। अब देखना होगा कि सचिव सरकार के इस अल्टीमेटम को स्वीकार कर ड्यूटी पर लौटते हैं या प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ती है।

