सीपत; 40 साल से जिस जमीन पर खेती, उसी से बेदखली का दबाव..रविवार को खेत नापने पहुंचे पटवारी, कोर्ट में मामला लंबित फिर भी कार्रवाई पर उठे सवाल!

बिलासपुर: (प्रांशु क्षत्रिय) मस्तूरी विकासखंड के सीपत तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नवागांव (हरदाडीह) में जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। नवागांव निवासी बसंत खुसरो ने आरोप लगाया है कि जिस करीब दो एकड़ जमीन पर उनका परिवार पिछले 40 से 50 वर्षों से खेती-किसानी करता आ रहा है, उसे खाली कराने के लिए पंचायत के कुछ पदाधिकारियों और प्रशासनिक अमले द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि जमीन से जुड़ा मामला पिछले करीब पांच वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है। बसंत खुसरो का कहना है कि वह आदिवासी वर्ग से हैं और खेती-किसानी ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन यादव, रोजगार सहायक सुशील रात्रे, पंचगण और पटवारी द्वारा बिना सीमांकन के उन्हें जमीन खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार के अवकाश के दिन भी पटवारी टेप लेकर जमीन की नाप-जोख करने पहुंचे। बसंत का आरोप है कि जमीन को लेकर मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि तहसील, थाना और एसडीएम कार्यालय से बार-बार नोटिस मिल रहे हैं। वहीं, जिस जमीन पर वह वर्षों से खेती करते आ रहे हैं, वहां इस बार धान की रोपाई करने से भी रोका जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सामान्य दिनों में पटवारी से एक हस्ताक्षर कराने के लिए लोगों को परेशान होना पड़ता है, लेकिन उनके मामले में रविवार के दिन भी पटवारी मौके पर पहुंच गए। बसंत ने पटवारी पर आर्थिक लाभ लेकर जमीन खाली कराने के लिए प्रयास करने का आरोप लगाया है।
पंचायत का पक्ष…..
वहीं उपसरपंच अरविंद जांगड़े ने आरोपों को अलग तरीके से रखते हुए बताया कि ग्राम पंचायत नवागांव (हरदाडीह) में वीबी-जी राम-जी योजना के तहत जलसंवर्धन के लिए नया तालाब निर्माण कराया गया है। उनका आरोप है कि बसंत खुसरो और राजेश कुमार द्वारा तालाब की मेड़ को कथित रूप से तोड़कर पानी बाहर निकालने और वहां धान की रोपाई करने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी सूचना शासन को दी गई है।
तहसीलदार ने क्या कहा?
इस पूरे मामले में तहसीलदार गरिमा ठाकुर ने बताया कि सरपंच अर्जुन यादव द्वारा तहसील कार्यालय में सूचना दी गई थी। सूचना के आधार पर काम रुकवाने के लिए आदेशित किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय का जो फैसला आएगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार ने यह भी स्पष्ट किया कि पटवारी उनके ही आदेश पर ग्राम नवागांव गया था और उसे मौके पर पंचनामा रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। अब सवाल यह है कि जब जमीन का विवाद न्यायालय में विचाराधीन है, तो मौके पर बार-बार कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान कैसे होगा?
